भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 363, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 363

शृङ्गारशतक

मैं पेड़ पर बैठा ही था कि, इतनेमें किसीने आकर खिड़कीके किवा खटखटाये और धीरेसे कहा—“कुरुणा ! किवाड़ खोल” । कुरुणा का खोका नाम था । कुरुणाने आकर दरवाजा खोल दिया । तब आगन्तुक ने कहा—“मैं थोड़ी देरमें नशोपत्त से टिचन होकर आता तुम खाने-पीने का इन्तज़ाम करो ।”

Popular Press—Calcutta.