शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
पृष्ठ 373, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 373
टमासपान
सामने ही एक गंडासा पड़ा देखा । मैंने आव देखा न ताव ; चटपसे गंडासा उठा कर चौकीदार की गल्लन पर मारा और उसका सिर धड़पसे जुटा कर दिया । मैं फौरन ही उलटे पैरों आकर उसी ठुंच पर चढ़ गया । कहूणा रसोई से निकल कर चौकीदार को भोजन के लिये बुलाने को कभरे में पुसी । वह बहों का दृश्य देख कर चक्करा गड़े । उसके सरस्ते पत्तीना टपक रहा था ; होश-हवास फाटला हो गये थे ।
किंग पर दाराज उल्लेख करने के लिये... (faint text at the bottom right)