शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 376
शुभारभ्युतक
उसने एक टाटकी बोरीं लाकर उसमें चौकीदारकी लाश रखी और उसका मुँह बन्द करके तुरन्तसे बौधिनर उसे सिर पर उठा लिया और एक छुराला हाथमें लेकर घरमें बाहर निकली। मैं भी कुछ फासलसे उसके पीछे हो लिया। वह, लाशको सिर पर रखे हुए, अस्मान वाट पर पहुँची। लाशको नीचे पटक कर, उसने एक गद्दारा गड्ढा खादा और उसमें लक्ष्मी दफन दी।
LOVE-LAKSHMI PUZZLES—GANGUTTA.