भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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पृष्ठ 380, कुल 544 में से

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पृष्ठ 380

शुभारम्भानक

उसने मेरे बैठने के लिए सट्टार खासन बिछा दिया। इसके बाद हुआ जूठा कर मेरे हाथों में दे दिया। मेरी बात सुनते ही वह सब समझ गई और जवा-मुन कर बोली—“खरे! तुझे वह कलसुख है।” यह कहते हुए उसने सामने रखा हुआ

गंगासा उद्यानर मेरी पित्त प्य मारा।

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