भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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“गर्भाधानके समय पुरुषकी उम्र २५ सालकी और कन्याकी १६ सालकी होनी चाहिये, क्योंकि इन अवस्थाओंमें पुरुष और स्त्री में समान बलवीर्य हो जाता है।

“सोलह बरससे कम उम्रकी स्त्रों में अगर पञ्चवीस बरससे कम उम्रका पुरुष गर्भाधान करता है, तो गर्भ कोखमें ही बिगड़ जाता है—बालक पैदा नहीं होता ; अगर पैदा भी होता है, तो बहुत दिन जीता नहीं ; अगर किसी तरह जो भी जाता है, तो कमज़ोर और रोगी होता है ; इसलिये अत्यन्त छोटी उम्र की यानी १६ सालसे कम उम्रकी स्त्रों में गर्भाधान हरगिज़ न करना चाहिये।

“अब आप ही सोचिये, जब सोलह सालसे कम अवस्था की कन्यामें गर्भाधान करनेकी ही मनाही है, तब पहले शादी करनेसे क्या लाभ ? जब तक घर और बधू ‘विवाह’ किस विड़िया का नाम है, इस बातको न समझे, तब तक विवाह में क्या आनन्द है ? अतः आप बाईकी शादी सोलह बरसकी उम्रमें ही करें।” सेठने ब्राह्मणोंकी बात ठीक समझी, अतः स्वीकार कर ली।

समय जाते देर नहीं लगती। कन्दर्पकलाने सोलहवें बरसमें कृदम रखा। माता-पिताको घर खोजनेकी फ़िक पड़ी। नगर-नगर और गाँव-गाँवमें नाई और ब्राह्मण भेजे गये। ईश्वर की दयासे कुल-शील-धन-वैभव प्रभृतिमें समान घर और सुन्दर रूपवान, विद्वान, बलवान और वीर्यवान बर मिल गया। बरका