भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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नाम गुणनिधि था । गुणनिधि वास्तवमें ही गुणोंका भाण्डार था । जिस तरह कन्दर्पकला अपने बापकी इकलौती और लाड़ली बेटी थी ; उसी तरह गुणनिधि भी अपने पिताका इकलौता और लाड़ला पुत्र था । लड़की लड़केने एक दूसरेके बिच देखकर एक दूसरेको पसन्द कर लिया । सेठ सेठानीने भी लड़केमें जामाताके सब उत्तम गुण देखकर, उसे अपना जमाई बनाना स्वीकार कर लिया । सेठने सेठानीसे कहा कि, शास्त्रमें भले और खुरे जमाईके लक्षण इस प्रकार लिखे हैं—

जमाईके गुण ।

विद्याशौच्यर्थधनाश्रयो गुणनिधिः ख्याता युवा सुन्दरः ।

सच्चारः सुकुलोद्भवोमधुरवाम् दाता दयासागरः ।

भोगी भूरिकुटुम्बवान् स्थिरमतिः पापार्तिहीनो बली ।

जामाता परिवर्णितः कविवरेरंवरविधः सत्तमः ॥

“विद्वान्, बहादुर, धनवान्, गुणवान्, सच्चरित्र, अच्छे कुलमें पैदा हुआ, मीठा बोलनेवाला, दातार-फ़्रैयाज़, दयाका समुद्र, भोगी, बहुतसे कुटुम्बियोंवाला, स्थिरबुद्धि, धर्मात्मा और बलवान् जमाई अच्छा होता है ।

जमाईके दोष ।

वृद्धो दुर्व्यसनौ दयाविरहितो रोगी महापापवान् ।

घण्टो दुष्कुलोद्भवश्च पिगुनो धूर्त्ताजतिवद्भयहः ।