शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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भर्तृहरिकृत
शृंगार-शतक ।
शम्भुस्वयंभुहरयो हरिणैर्ज्ञणानां ।
येनाक्रियन्त सततं गृहकर्मदासाः ॥
वाचामगोचरचरित्रविचित्रिताय ।
तस्यै नमो भगवते कुसुमाशुषाय ॥१॥
जिन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेशको, मृगनयनी कामिनियोंके शरका काम-धन्वा करनेके लिये, दास बना रक्खा है, जिनके वैचित्र्य-चरित्रोंका वर्णन वाणीसे किया नहीं जा सकता,—उन ण्पाशुष भगवान् कामदेवको हमारा नमस्कार है ॥१॥
भगवान् कामदेवकी विचित्र महिमाका पार नहीं । आपके जीब-अजीब कामोंका बखान ज़बानसे कौन कर सकता है ?