भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( २ )

यद्यपि आपका शस्त्र फूलोंका धनुषाण है ; तथापि आपने अपने इसी हथियारसे त्रिलोकियोंको अपने अधीन कर रक्खा है । औरों की क्या चलाई, स्वयं जगत्के रचनेवाले ब्रह्मा, पालनेवाले विष्णु और संहार करनेवाले शिवजी तकको आपने बाकी नहीं छोड़ा । इन तीनों देवताओंको भी आपने, घरका काम-धन्धा करनेके लिये, कुरङ्गनयनी सुन्दरी कामिनियोंका गुलाम बना दिया है । यद्यपि भगवान् कामदेव भगवान् विष्णुके पुत्र हैं, पर आप अपने पितासे भी बड़ गये । "गुरु गुड़ रहे और चेला चीनी हो गये" वाली कहावत आपने चरितार्थ की । आपने स्वयं अपने पिता पर ही हाथ साफ किये । उन्हें ही अनेक कुरूप मँकवाये । अपने पितासे लक्ष्मी और सकिम्णी प्रभृतिकी गुलामी करवा कर ही आपको सन्तोष नहीं हुआ । आपने उन्हें परनारी ब्रजबाताओं तककी मुहब्ततमें पागलसा कर दिया । यहाँ तक कि, उनसे मालिन और मनिहारिन तकके स्वांग भरवाये । एक बार बेचारोंको जलन्धर-पल्लो वृन्दाके यहाँ भेष बदलकर जाने तक पर मजबूर किया और शेषमें उनका फ़र्ज़ीता करवाया ।

पूर्ण योगी, श्मशान-वासी शिवजी तकको आपने नहीं छोड़ा । बेचारोंको शैलसुताका क्रांत-दास बना दिया, यहाँ तक तो खेर थी । आपने एक बार उनकी सारी सुघ-बुध हर ली और मोहिनीके पछि इस बुरी तरहसे दौड़ाया कि, हमसे तो लिखा तक नहीं जाता । एक और मोक्ति पर शिवजी समाधिमें