शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 415
श्रृङ्गारशतक
१ इन्द्रधवन-रुद्रश्या महलमे गुणानिधि अपनी परम प्रियाको आलिंगन करके लेट रहा, पर कन्दर्पकलाका दिल तो अपने प्यारे यारकी यादमे लगा हुआ था, अतः वह मुँह फेर और करवट बदलकर सोया। जब उसके पतिसे उसको साड़ी सूँच ली, तब वह
पल्लवशतक