शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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इन सबको वृथा समझते हैं। उन्हें इनमें जरा भी आनन्द नहीं मालूम होता।
सार—विषयासक्त कामियोंको स्त्रियाँ अच्छी लगती हैं ; पर इन्द्रिय-विजयी ज्ञानियों को निरन्तर योगाभ्यासमें लगे रहना ही अच्छा मालूम होता है।
9१. Of what use are the sweet conversation with a lovely woman, the nectar of her lips, her moon-like face with scented breath and the sweet enjoyment of sexual intercourse while pressing her pot-like breasts to the bosom, to those whose mind and soul are constant friends and take delight in the practice of concentration.
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त्रजितात्मसु सम्बद्धः समाधिकृतचापलः ।
मुजंगकुटिलः स्तब्धो श्रूविनेषः खलायते ॥१७॥
अजितेन्द्रिय मनुष्योसे सम्बन्ध रखनेवाला, चित्तकी एकाग्रता या समाधिमें अतीव चञ्चलता करनेवाला, सपके समान कुटिल और स्तब्ध स्त्रियोंका भूक्षेप या कटाक्ष खलके समान आचरण करता है ॥१७॥
खुलासा—स्त्रियोंका कटाक्ष (चतुरार्द्ध से भौंह चलाना) अजितेन्द्रियोंसे सम्बन्ध रखता है, चित्तकी एकाग्र रहने नहीं देता और समाधिको भङ्ग करता है, अतएव वह सपके समान कुटिल