भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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शुद्धिपत्रक

संसार में सबकी कवि पकसी नहीं होती । किसी को शुद्धि पसन्द है, कामितियों का स्वर्गाय आतन्त्र लुटना पसन्द है; किसी को सिद्धी विष से भी घुरी लगती है, उन्हें वैराग्य पसन्द है और किसी को नीति का अध्ययन पसन्द है । इसी से महाराज भक्तहरि ने तीन तरह के मनुष्यों के लिये शुद्धि, वैराग्य और नीति पर तीन शतक लिखे ।

(पृ० २०)

Popular Press—Calcutta.