शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
पृष्ठ 500, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 500
शुद्धिपत्रक
संसार में सबकी कवि पकसी नहीं होती । किसी को शुद्धि पसन्द है, कामितियों का स्वर्गाय आतन्त्र लुटना पसन्द है; किसी को सिद्धी विष से भी घुरी लगती है, उन्हें वैराग्य पसन्द है और किसी को नीति का अध्ययन पसन्द है । इसी से महाराज भक्तहरि ने तीन तरह के मनुष्यों के लिये शुद्धि, वैराग्य और नीति पर तीन शतक लिखे ।
(पृ० २०)
Popular Press—Calcutta.