भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । ११

और मोदक प्रभृति लिखे हैं। जिन दवाओंको खाकर श्रोत्रुण भगवान् १६१०८ रानियोंको राजी करते थे, वे भी इस ग्रन्थमें लिखी हैं। बहुत क्या—काम की प्राप्ति भी “चिकित्सा-चन्द्रोदय”से ही हो सकती है।

अब रही मोक्ष ; बिना शरीरके निरोग रहे, ईश्वरका नाम भी लेना कठिन है। जो रोगार्स है, रोग-पीड़ित है, उसका मन ईश्वर में नहीं लगता। लेकिन “चिकित्साचन्द्रोदय”का पाठ करने वाले और उसमें लिखी बातों पर अमल करने वालेको रोग सता नहीं सकते ; अतः वह मन लगाकर भगवान्का भजन कर सकता और स्वर्ग या मोक्ष लाभ कर सकता है।

जो ग्रन्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थोंका देने वाला है, उसे कौन खरीदना न चाहेगा ?

चिकित्साचन्द्रोदयका मूल्य ।

भागसजिल्दका दामअजिल्दका दाम
पहला भाग३॥॥३)
दूसरा भाग५॥॥५)
तीसरा भाग५)४॥
चौथा भाग४॥३॥॥
पाँचवाँ भाग५॥॥५)
छठा भाग४)३॥
सातवाँ भाग१११॥१०॥

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