शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१० हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।
मिलाकर चार महीने खानेसे बूढ़ा भी जवानकी तरह स्त्री-भोग कर सकता है ।
(५) विच्छूके काटे स्थान पर आकका दूध मलनेसे विच्छूका जहर उतर जाता है ।
(६) नीबूके रसमें जमालगोटा विसकर, आँखोंमें आँजनेसे साँपका जहर उतरे जाता है ।
पेसे-पेसे हज़ारों अमीरी और गरीबी नुसखे “चिकित्सा-चन्द्रोदय”में लिखे हैं । दूसरोंका भला करनेसे पुण्य होता है । “चिकित्साचन्द्रोदय” पढ़ने वाला निश्चय ही परोपकार करके पुण्य सञ्चय कर सकता है ।
जो पुरुष हर शीतकालमें बाजीकरण औषधियाँ सेवन करता है, उसमें स्त्री-भोगकी सामर्थ्य घोट्टेके समान हो जाती है । जो बाजीकरण औषधियाँ सेवन नहीं करता, केवल रोटी-दालके बल पर स्त्री भोगना चाहता है, वह तो भारी ग़लती करता है । “चिकित्साचन्द्रोदय”के चौथे भागमें बाजीकरण औषधियोंका खज़ाना है ।
यद्यपि स्त्रीमें पुरुषसे अठगुना काम रहता है, तो भी वह पुरुषके बाद.....होती है । जब तक स्त्री.....नहीं होती, वह सन्तुष्ट नहीं होती ; इसलिये पहले बाजीकरण औषधियाँ खाकर बल-बीर्य बढ़ाना चाहिये । फिर समय पर स्तम्भनकारक औषधियाँ की सहायता लेनी चाहिये, तभी स्त्री-भोगका आनन्द मिलता है । “चिकित्सा चन्द्रोदय”में अनेक तरहके लेप, गोली, तिले,