भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । ६

कम-से-कम २००) रु० महीना और ऊपरमें १०००) रु० महीना तक कमा सकते हैं। कम और ज़ियादा कमाना अकू पर निर्भर है। पर १००) २००) महीना तो एक साधारण बुद्धिवालाभी पैदा कर सकता है और अपने ही गाँवमें देवताकी तरह पुज सकता है। इस तरह इस ग्रन्थसे अर्थ या धनकी प्राप्ति हो सकती है।

इसके पढ़नेवाला अगर अपने गाँववालोंको उनके रोग होनेपर, इस ग्रन्थसे रोगका निदान करके, कोई जड़लकी जड़ी या सस्तीसी एसारोकी दवा बता दे, तो रोगीकी जान बच सकता है। गरीबोंके लिए, इस ग्रन्थमें, हरेक रोगके नाश करने-को ऐसे-ऐसे नुसखे लिखे हैं, जिनसे भयंकर रोग आराम हो जायँ और पैसा भी खर्च न हो; और हो तो उतना हो, जितना एक गरीबसे गरीब भी खर्चकर सके। जैसे—

(१) श्रीठेके पिसे-छने चूर्णाकी नास लेनेसे मृगी आराम हो जाती है। कड़वी तोरई' को पानीमें पीसकर, एक कपड़ेमें रख लेने और वेहोश मृगी-रोगीकी नाकमें दो चार बूँद टपकानेसे फौरन ही रोगी होशमें आ जाता है। सफेद प्याज़का रस नाकमें टपकाने से मृगी रोग जाता रहता है। (चिकित्साचन्द्रोदय-सातवाँ भाग)

(२) तुलसीके स्वरसमें “घी और कालीमिर्च” मिलाकर सेवन करनेसे वायु रोग नाश हो जाते हैं।

(३) त्रिभलेका-चूर्ण १ तोले, शुद्ध शिलाजीत २ माशे और शहद १ तोले मिलाकर चाटनेसे समस्त प्रमेह नाश हो जाते हैं।

(४) एक तोले विदारीफन्द, एक तोले घी और दो तोले मिर्ची