भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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८ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

प्रत्येक दिन दो तीन घण्टे दुनियाके अखबार और ग्रन्थ देखते हैं। हमारे देशके लाख दो लाखकी सालाना आमदनी वाले जब कहते हैं—“अजी समय तो मिलता ही नहीं”—तब हमें हँसी आ जाती है? हमें उनकी मूर्खता और टाइमकी पाबन्दी न जानने पर दया भी आने लगती है।

आप उपन्यास पढ़ना त्यागिये, पूरन मलके ख्याल, ढोला-मारू, निहालदे और लण्डन रहस्य प्रभृतिको दूर फेंकिये। इनके पढ़नेसे कोई लाभ नहीं। इनके पढ़नेसे विषयवासना जागती और आयु क्षीण होती है। “चिकित्सा-चन्द्रोदय”का पाठ बिछा नागा दो घण्टे या एक ही घण्टे रोज करनेसे रोग दूर भागते और उग्र बढ़ती है। इतना ही नहीं—लोक-परलोक भी बनते हैं। बिना शरीरके नीरोग रहे, आप न तो धनही कमा सकते हैं, न ईश्वर-भजन ही कर सकते हैं और न कामिनीको ही भोग सकते हैं। इससे मालूम होता है कि,

“चिकित्साचन्द्रोदय”

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों ही पदार्थोंकी मूल है। जो लोग निर्धन हैं, १०) २०) २५ की नौकरी करके, जने-जनेकी गालियाँ सुनकर और ठोकरे खाकर जीवनको बर्बाद करते हैं, अथवा नौकरीके लिए मारे-मारे फिरते हैं, वे दो बरसमें इस ग्रन्थको पढ़कर और एक साल किसी सदुद्देश्यके हाथके नीचे काम करके अपने गाँवमें ही—अपनी बुद्धि-अनुसार