भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। ७

आजके भारतमें और उस समयके भारतमें बड़ा फ़र्क हो जायगा। उस समयके स्त्री-पुरुष प्राचीन कालके स्त्री-पुरुषों-की तरह हृष्ट-पुष्ट बलवान और दीर्घजीवी होने लगेगे और देशमें बहुत कम रोगी नज़र आवेगे। बहुत क्या—हम प्रत्येक हिन्दी भाषा जानने वालेसे जोरके साथ सिफ़ारिश करते हैं, कि वह हजार जगहसे रुपये बचाकर अथवा दूसरोंसे उधार लेकर भी इस ग्रन्थ-रत्नको खरीदे और नित्य-प्रति नियमसे घण्टे-दो घण्टे नित्य पढ़े।

दो वरसमें घर बैठे पूर्ण वैद्य।

इस ग्रन्थमें ४००० सफे हैं। मन्दसे-मन्दा हिन्दी पढ़नेवाला दो घण्टेमें पाँच सफे अच्छी तरह समझ-समझकर पढ़ और याद कर सकता है। इस हिसाबसे ५×३० = १५० सफे वह हर महीने ख़तम कर सकता है और एक वरसमें ५×३०×१२ = १८०० सफे ख़तम कर सकता है और २ सालमें ३६०० सफे शेष कर सकता है। ऐसा कौन आदमी है, जो नित्य दो घण्टे का समय न निकाल सके ? ज़ियादा-से-ज़ियादा काम करनेवाले को भी २४ घण्टेमें २ घण्टे बच सकते हैं। समय या अवकाश न मिलनेकी शिकायत मूर्ख ही किया करते हैं। अमेरिकाके वे धनकुवेर जिनकी आमदनी हर दिन १ लाखसे भी ज़ियादा है, जिनकी दुनियामें चार-चार और पाँच-पाँच सौ दूकाने हैं,