शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।
भाषाभाषी मनुष्यको इतना पसन्द आया, कि उसके पाँच २ और छे-छे हजारों आठ संस्करण हो गये । हजारों लोगोंने उससे लाभ उठाया और जीवनका सुधार किया । लेकिन “स्वास्थ्यरक्षा” पूर्ण आयुर्वेद नहीं है । वह तो आयुर्वेदका एक छोटासा अंश है । इसलिए बाबू साहबने इस बुढ़ापेमें, सब सुखोंको तिला-अलि-देकर, अपने स्वास्थ्यका बलिदान करके, चार हजार सफोंका “चिकित्साचन्द्रोदय” नामक ग्रन्थ लिखा है और उसे सात भागोंमें तकुसीम किया है, ताकि लोगोंको उठा कर पढ़नेमें ग्रन्थ भारी न मालूम हो और खरीदनेमें भी भारी न जान पड़े ।
बाबू साहबको लिखी “स्वास्थ्यरक्षा” का जैसा आदर हुआ, वैसा ही बलिक उससे भी बढ़ कर आदर पबलिकने इस “चिकित्साचन्द्रोदय”का किया है । काश्मीरसे कन्या कुमारी और अटकसे कटक या सिन्धसे आसाम तक इसका प्रचार दिन-दूना रात-चौगुना बढ़ रहा है । हरेक सेठ-साहूकार, मुनीम-गुमाश्वते, वकील-मुहरिरे, बैरिष्टर-जज, तहसीलदार-डिप्टी कलेक्टर, रेलबाबू-तारबाबू, हिन्दू और मुसलमान, जौनी और ईसाई, आर्यसमाजी और ब्राह्मसमाजी—सभी इसे खरीद-खरीद कर पढ़ने लगे हैं । यह बड़ी ही खुशीकी बात है, पर अभी हरेक हिन्दी भाषाभाषीको इस ग्रन्थको खबर नहीं—क्योंकि भारत बहुत बड़ा देश है—जब सभीको इस महाग्रन्थकी खबर हो जायगी, सभी इसे पढ़ने लगेगे, तब