भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। ५

जाननेसे ही वे गलतियाँ नहीं करेंगे और रोगोंके पञ्चोंमें भी न फँसेंगे।

रोगोंसे बचने और आरोग्य रहनेके तरीके कैसे मालूम हों ?

रोगोंसे बचने, आरोग्य रहने, अकाल मृत्युसे छुटकारा पाने और पूरी आयु भोगनेके तरीके “आयुर्वेद” में लिखे हैं। आयुर्वेद पढ़नेसे ही हरेक आदमी उपरोक्त बातोंको जान सकता है ; पर हमारा आयुर्वेद संस्कृत भाषामें है। आज-कल सभी भारतवासों संस्कृत नहीं जानते, इसलिए वे आयुर्वेद पढ़ नहीं सकते। बम्बई प्रभृतिमें आयुर्वेदका हिन्दी अनुवाद भी छप गया है, पर वह ऐसा कठिन है, कि वह बिना किसी गुरुके पढ़ाये समझमें नहीं आता। अब जो लोग वैद्यके धन्धेके सिवा और धन्धे करते हैं, जिनकी उम्र अब विद्या-योग्य पढ़ने नहीं रही है, अथवा जिनके बिना कमाये गुहस्थीका पालन नहीं हो सकता, वे अब आयुर्वेद कैसे पढ़ सकते हैं और गुरुकी फीस कहाँसे दे सकते हैं ?

लाखों आदमी नौकरी-चाकरी या दूसरा धन्धा करते हुए भी आयुर्वेद पढ़ना चाहते हैं, पर हिन्दीमें—बोलचालकी सरल हिन्दीमें—आयुर्वेद न होनेसे, इच्छा रहने पर भी, मन मार कर रह जाते हैं। इसीलिए हमारी कम्पनीके मुख्य सञ्चालक वयोवृद्ध, पूर्ण अनुभवी वैद्य बाबू हरिदासजीने, लोकोपकारार्थ, पहले “स्वास्थ्यरक्षा” नामक ग्रन्थ लिखा था। वह भारतके हर हिन्दी