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शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । ६

कम-से-कम २००) रु० महीना और ऊपरमें १०००) रु० महीना तक कमा सकते हैं। कम और ज़ियादा कमाना अकू पर निर्भर है। पर १००) २००) महीना तो एक साधारण बुद्धिवालाभी पैदा कर सकता है और अपने ही गाँवमें देवताकी तरह पुज सकता है। इस तरह इस ग्रन्थसे अर्थ या धनकी प्राप्ति हो सकती है।

इसके पढ़नेवाला अगर अपने गाँववालोंको उनके रोग होनेपर, इस ग्रन्थसे रोगका निदान करके, कोई जड़लकी जड़ी या सस्तीसी एसारोकी दवा बता दे, तो रोगीकी जान बच सकता है। गरीबोंके लिए, इस ग्रन्थमें, हरेक रोगके नाश करने-को ऐसे-ऐसे नुसखे लिखे हैं, जिनसे भयंकर रोग आराम हो जायँ और पैसा भी खर्च न हो; और हो तो उतना हो, जितना एक गरीबसे गरीब भी खर्चकर सके। जैसे—

(१) श्रीठेके पिसे-छने चूर्णाकी नास लेनेसे मृगी आराम हो जाती है। कड़वी तोरई' को पानीमें पीसकर, एक कपड़ेमें रख लेने और वेहोश मृगी-रोगीकी नाकमें दो चार बूँद टपकानेसे फौरन ही रोगी होशमें आ जाता है। सफेद प्याज़का रस नाकमें टपकाने से मृगी रोग जाता रहता है। (चिकित्साचन्द्रोदय-सातवाँ भाग)

(२) तुलसीके स्वरसमें “घी और कालीमिर्च” मिलाकर सेवन करनेसे वायु रोग नाश हो जाते हैं।

(३) त्रिभलेका-चूर्ण १ तोले, शुद्ध शिलाजीत २ माशे और शहद १ तोले मिलाकर चाटनेसे समस्त प्रमेह नाश हो जाते हैं।

(४) एक तोले विदारीफन्द, एक तोले घी और दो तोले मिर्ची

१० हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।

मिलाकर चार महीने खानेसे बूढ़ा भी जवानकी तरह स्त्री-भोग कर सकता है ।

(५) विच्छूके काटे स्थान पर आकका दूध मलनेसे विच्छूका जहर उतर जाता है ।

(६) नीबूके रसमें जमालगोटा विसकर, आँखोंमें आँजनेसे साँपका जहर उतरे जाता है ।

पेसे-पेसे हज़ारों अमीरी और गरीबी नुसखे “चिकित्सा-चन्द्रोदय”में लिखे हैं । दूसरोंका भला करनेसे पुण्य होता है । “चिकित्साचन्द्रोदय” पढ़ने वाला निश्चय ही परोपकार करके पुण्य सञ्चय कर सकता है ।

जो पुरुष हर शीतकालमें बाजीकरण औषधियाँ सेवन करता है, उसमें स्त्री-भोगकी सामर्थ्य घोट्टेके समान हो जाती है । जो बाजीकरण औषधियाँ सेवन नहीं करता, केवल रोटी-दालके बल पर स्त्री भोगना चाहता है, वह तो भारी ग़लती करता है । “चिकित्साचन्द्रोदय”के चौथे भागमें बाजीकरण औषधियोंका खज़ाना है ।

यद्यपि स्त्रीमें पुरुषसे अठगुना काम रहता है, तो भी वह पुरुषके बाद.....होती है । जब तक स्त्री.....नहीं होती, वह सन्तुष्ट नहीं होती ; इसलिये पहले बाजीकरण औषधियाँ खाकर बल-बीर्य बढ़ाना चाहिये । फिर समय पर स्तम्भनकारक औषधियाँ की सहायता लेनी चाहिये, तभी स्त्री-भोगका आनन्द मिलता है । “चिकित्सा चन्द्रोदय”में अनेक तरहके लेप, गोली, तिले,

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और मोदक प्रभृति लिखे हैं। जिन दवाओंको खाकर श्रोत्रुण भगवान् १६१०८ रानियोंको राजी करते थे, वे भी इस ग्रन्थमें लिखी हैं। बहुत क्या—काम की प्राप्ति भी “चिकित्सा-चन्द्रोदय”से ही हो सकती है।

अब रही मोक्ष ; बिना शरीरके निरोग रहे, ईश्वरका नाम भी लेना कठिन है। जो रोगार्स है, रोग-पीड़ित है, उसका मन ईश्वर में नहीं लगता। लेकिन “चिकित्साचन्द्रोदय”का पाठ करने वाले और उसमें लिखी बातों पर अमल करने वालेको रोग सता नहीं सकते ; अतः वह मन लगाकर भगवान्का भजन कर सकता और स्वर्ग या मोक्ष लाभ कर सकता है।

जो ग्रन्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थोंका देने वाला है, उसे कौन खरीदना न चाहेगा ?

चिकित्साचन्द्रोदयका मूल्य ।

भागसजिल्दका दामअजिल्दका दाम
पहला भाग३॥॥३)
दूसरा भाग५॥॥५)
तीसरा भाग५)४॥
चौथा भाग४॥३॥॥
पाँचवाँ भाग५॥॥५)
छठा भाग४)३॥
सातवाँ भाग१११॥१०॥

४०) |


३५)

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किफ़ायत ।

जो सज़्जन सातों भाग एक साथ ख़रीदेंगे, उन्हें सज़िल्द ३३॥ में और अज़िल्द सात भाग २६॥ में मिलेंगे । डाक या रेल-ख़र्चे जिम्मे ख़रीदारान । ५) से नीचे की ख़रीद पर कुछ भी कमीशन नहीं मिलेगा । ६) से ११॥ तक एक आना रुपया और १०) से २४) तक दो आना रुपया तथा २५) से ५०) तक अर्द्धा आना रुपया कमीशन मिलेगा ।

जिन्हें विश्वास न हो

और जिनका काम कभी इस कम्पनीसे न पड़ा हो, वे कोई-सा एक भाग मँगाकर अपनी तसल्ली करलें । हाँडोंमें एक चाँवल देखा जाता है । अगर वह पका हुआ होता है, तो सभी पके होते हैं ।

रोगियोंके लिए सलाह ।

— * —

जिन रोगियोंने बचपनमें नासमभीसे हस्तमैथुन वर्गैः से अपने तर्ह निकम्मा बना लिया है, जिनका वीर्य दूषित हो गया है, जिनका वीर्य क्षीण हो गया है, अथवा पेशाब-पाषाणके समय जाता है या स्वप्नद्रोष होते हैं, उन्हें विद्यापनवाज़ों की लच्छेदार बातोंमें आकर अपना धन और स्वास्थ्य नष्ट न करना चाहिये । जिन्होंने वैद्यकका एक अक्षर भी नहीं सीखा, वे

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सौ-सौ रोग की एक-एक दवा बेचकर लोगोंको बेमौत मार रहे हैं; पर दुःख है, कि लोग ज़रा भी नहीं समझते। हमारे यहां “विक्रितसावन्द्रोदय”के लेखक, वयोवृद्ध बाबू हरिदास जी की बनाई हुई, निश्चय ही फल दिखाने वाली दवाएँ तैयार रहती हैं। आप उन्हें जाड़ेमें सेवन कीजिये और स्त्री-भोगका सच्चा आनन्द लूटिये। नीचे लिखी हुई दवाएँ परमोत्तम हैं :-

१-अम्रक भस्म १००० पुटी ४०) रु० तोले।

२-वंगेश्वर १० आँचकी ८) रु० तोले।

३-मृगनाभ्यादि बटी ८० गोली १०) रु०।

४-धातु पुष्टिकर चूर्ण ८० मात्रा १५) रु०।

५-कामदेव चूर्ण ८० मात्रा २०) रु०।

६-चन्द्रनादि तैल १ सेर १६) रु०।

७-तिला नं० १—एक शीशी ५)

सेवन-विधि

ऐसी चीज़ें बहुत करके, जाड़ेमें, सेवन करनी चाहिये। पहले ४० दिन धातुपुष्टिकर चूर्ण, फिर ४० दिन कामदेव चूर्ण, फिर ४० दिन वंगेश्वर या मृगनाभ्यादि बटी और फिर ४० दिन १००० आँचको अम्रक सेवन करनी चाहिये। जितने दिन ये दवाएँ खाई जायँ, उतने दिन “चन्द्रनादि तैल” शरीरमें लगाना चाहिये और जननेन्द्रिय की नसोंका दोष दूर करनेको कम-से-कम १ शीशी तिला लगाना चाहिये। इसो तरह ५ महीना हमारी दवा

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खानेसे मनुष्य पूर्ण बलवान, वीर्यवान और पुष्ट हो सकता है। उसका वीर्य कपूरके समान सफेद, पत्थरके समान वजनी और प्रसंगमें देर तक ठहरने और आनन्द देने वाला हो जाता है। हमने इन दवाओंसे ३० वर्षमें हजारों रोगी आराम किये हैं। जबदी करनेसे इतना बल आ नहीं सकता। जो दस बीस दिनोंमें धातु रोग आराम करनेका दावा करते हैं, वे लोगोंको फुसला कर ठगते हैं। हमें भगवान्का भय है , इसलिए मिथ्या लिखना और कहना पसन्द नहीं। यश-अपयश तो भगवानके हाथ है।

कितना खर्च पड़ेगा ?

पहले ४० दिनमें १५) का धातु पुष्टिकर, ॥८) का उदरशोधन (दवा शुद्ध करनेसे पहले पेट साफ कर लेना परमावश्यक है) और ३२) रु० का दो सेर “चन्दनादि तेल”। इस तरह ४७॥८) खर्च होगा।

दूसरे ४० दिनमें २०) का कामदेव चूर्ण और ३२) का चन्दनादि तेल, इस तरह ५२) खर्च होगा।

तीसरे ४० दिनमें १५) की बंगेश्वर या १५) की मृगनाभ्यादि बट्टी और ३२) का चन्दनादि तेल खर्च होगा, इस तरह ४७) रु० खर्च होगा।

चौथे ४० दिनमें ५०) अम्रक भस्म और ३२) का चन्दनादि तेल, इस तरह ८२) खर्च होगा।

कुल मिलाकर ४७॥८)+५२)+४७)+८२)=२२८॥८) खर्च

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होगा । जो धनी हैं, जिन्हें रुपयोंका मोह नहीं है, वे ऊपर लिखी चीजें सेवन करके खी-भोगका सुख लूटें । सूरज पुरबका पच्छममें उदय हो, तभी यह दवाएँ फेल हो सकती हैं । ५० की खरीद पर २०) सैकड़ा और २२८) की खरीद पर ३०) सैकड़ा कमीशन मिलेगा ; यानी २२८) की दवा लेने वालेको प्रायः १६०) रु० देने होंगे । लेकिन १६०) रुपये पहले भेज देनेसे ही यह रियायत होगी ।

गरीबोंके लिए ।

हमारा धातुपुष्टिकर चूर्ण २ महीने और कामदेव चूर्ण २ महीने खाना । चाहिये, इसके बाद हो सके तो ८० गोली मुग्नाभ्यादि बटी खा लेनी चाहिये । शरीरमें काली तिलोंका तेल लगा कर नहाना चाहिये । २ महीनेके धातुपुष्टिकरका दाम प्रायः २०), कामदेवका २८) और मुग्नाभ्यादि बटीका १५) खर्च होगा । यद्यपि ऊपरके इलाजकी बराबरी तो यह इलाज कर न सकेगा, पर इसमें शक नहीं कि, जिन्दगीका मजा आजायगा ।

किफायत ।

जो सज्जन ६०) से ऊपर की दवा खरीदेंगे, उन्हें ६०) की जगह ४५) रु० देना होगा । जो सज्जन २००) से ऊपरकी दवा इकट्ठी लेंगे उन्हें २००) की दवा १४०) में मिलेगी, डाक या रेल-खर्च खरीदारोंको देना होगा ।

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पत्र व्यवहार गुप्त।

सभो रोगियोंको चिड़ियाँ गुप्त रखो जाती हैं। कोई किसीकी भोतरी बात जान नहीं सकता; इसलिए अपना हाल दिल खोलकर, साफ हिन्दीभाषा और नागरी अक्षरोंमें लिखना चाहिये।

हमारी अठ्यर्थ महौषधियाँ।

हमारी नीचे लिखी दवाएं आज तक कभी फेल नहीं हुईं और न होंगी, वशर्त्त कि रोगका ठीक निदान करके सेवनकी जायँ। हम हर एक भाईसे प्रार्थना करते हैं कि, वह हमारी नीचे लिखी हुई चीजोंको परीक्षा करे और सदा इनसे काम ले। ग्रहस्थीमें इनकी रोज दरकार रहती ही है। इससे देशका धन देशमें रहेगा और ५) रु० का काम २) रु० में होगा। विश्वास कीजिये, हमने आज तक, अपने जीवनमें, किसीकी १ पाई भी धोखा देकर नहीं ली और न आगे वैसी इच्छा है। जीवन क्षण-भंगुर है, ईश्वरके पास जाना है, उसे अपने कर्मोंका जवाब देना है। अपनी १ पैसेकी चीज़का दाम १) रु० रखनेमें पाप नहीं—पर फूटो और बेकाम चीज़ देकर पैसा लेनेमें घोर पाप है। पाठक, हमारे इन शब्दोंपर विश्वास करके नीचे लिखा चीज़ अवश्य मँगावें और आज्ञावें—

नारायण तेल।

यह तेल अस्सी वायु रोग नाश करनेमें समवाण है। हम इसे अपनी युक्तिसे दवाएं घटा-बढ़ाकर बनाते हैं , इसको

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तैयारीमें लालचसे काम नहीं लेते और मिहनतसे जी नहीं चुपते ; इसलिये यह वायु रोगोंमें जादूका सा काम करता है । इसके सारे शरीरमें मलबाने, नाक और कानमें छोड़ने एवं गुदा में पिचकारी देनेसे सिरका जकड़ जाना, गर्दनका रहजाना— न फिरना, ठोड़ोका जकड़ जाना, बाँहका सूखना, लँगड़ापन, लूलापन, पैर जलना, पैर सोजाना, पसलीमें दर्द होना, पीठ के बाँसेमें पोड़ा होना, कमरमें वेदना होना, मुँहका टेढ़ा हो जाना, आधे शरीर या सारे शरीरका सूता हो जाना, दण्डेकी तरह हो जाना, धनुषकी तरह झुकजाना, फोर्तोंका फूलना और दर्द करना वगैरः लकवा, फालिज, हनुमह, शिरोमह, मन्था-स्तंभ, दण्डापतानक, धनुर्वात, पंगुता और खंजता प्रभृति सभी रोग आराम हो जाते हैं ।

जब आप वात रोग में सब दवाएँ करते-करते थक जावें, किसीकी दवासे आराम न हो, तब आप हमारा “नारायण” तैल और “योगराज गूगल” सेवन कीजिये ; अवश्य लाभ होगा । जिन रोगियोंको सिविल सर्जनोंने असाध्य कहकर त्याग दिया था, उन रोगियोंको हमने इन्हीं दो दवाओंसे आराम कर दिया । अगर रोगके उठते ही तार देकर हमारा “नारायण तेल” आधसेर और २५ गोली “योगराज गूगल” मँगाकर, रोगी शुद्ध करदे, तो हम दवाके साथ कहते हैं, कि उसका रोग नहीं बढ़ेगा और चन्द्र रोज़में आराम हो जायगा । भारी वातरोगोंमें आध पाव तेल तो एक दिनमें मल्लग जाता है, तब कहीं रोग दबता है,

B

१८ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।

इसीसे आध सेर तेलकी बात लिखी है । एक दिन हमारे एक आत्मीयकी छाती, पीठ और कमरमें, रातके २ बजे, ऐसा दर्द उठा, कि रोगी तड़फने लगा । जान पड़ता था, रोगी दिन निकलनेसे पहले ही ख़तम हो जायगा । हमने पूछा—“नारायण तेल है ?” जवाब मिला—“हाँ—!” हमने कहा—“चार आदमी सारे शरीरमें मालिश करो ।” एक पीठमें, एक छातीमें, एक हाथोंमें और एक पैरोंमें नारायण तेल मलने लगा । एक आदमी आगपर रुई गरम करता और दूसरा सेक करता था । परमात्माकी दयासे दो घण्टेमें रोगी एक-दम आराम होकर सो गया । देखनेसे मालूम हुआ कि, दो घण्टेमें तीन छटाँक तेल शरीरमें पेवस्त हो गया । अगर हम उस समय तेलका ढालच करते—कोरी चुपड़ा-चुपड़ी करते, तो रोगीको आराम न होता और रोगीके घरवालोंकी श्रद्धा “नारायणतेल”से उठ जाती । भयङ्कर रोगोंमें हर दिन कम-से-कम एक छटाँक “नारायण तेल” सारे शरीरमें रमाना चाहिये, तब तत्काल चमत्कार दीखता है ।

बरसात और शीतकालमें शरीरमें यकायक तकलीफ़ बढ़ी हो जाती है । लोगोंको अचानक लकवा या फालिज मारना है । जबतक डाक्टर वैद्य आते हैं, रोग डाकगाड़ीकी चालसे बढ़ जाता है । पीछे आराम करनेमें बड़ी कठिनाई होती है । अगर घरमें आध सेर “नारायण तेल” और “योगराज गुगल” या “सतीरगजकेसरी बटो” मौजूद हों तो, रोग फौरन दब जावे ।

हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । १६

इसलिये हर गृहस्थको काम-से-कम आध सेर “नारायण तेल”, १शीशो “योगराज गुटो” और १शीशो “समीरगजकेसरी बटो” हरवक अपने पास रखनी चाहियें । ये तीनों ८) आठ रुपये की चीजेंकरूप ८०) रु० का काम कर जाती हैं। “नारायण तेल”का दाम १२) रु० सेर है और आध पावसे कम कम नहीं मिलता ।

योगराज गुटी

योगराज गूगल नामी चीज है ; पर सभी वेध लालवके मारे उतनी अच्छा नहीं बनाते । अगर यह गूगल अच्छो तरहसे बनाई जाती है, तो बात रोगोंको तो जड़से आराम कर ही देती है ; बात रोगोंके अलावः प्रमेह, वातरक्त, पाण्डुरोग, मेद-वृद्धि-कोढ़, आमवात, उष नेत्ररोग, उदररोग, और शूलरोग वगैरः अनेक रोग इस एक ही दवासे निश्चय ही नाश हो जाते हैं । हम इसे परमोत्तम विधिसे बनाते हैं । हर गृहस्थको एक १शीशो पास रखनी चाहिये । २५ गोलीका दाम १) मात्र ।

नोट—नारायण तेल और योगराज गुटीका मेल है । आप हमारे कहनेसे, हमारे यहाँ की बनी दोनों चीजें १ बरस घरमें रख लीजिये । फिर देखिये, आपको कितना छव मिला और कितना रुपया आपका डाक्टरोंके घरमें जानेसे बचा । आपसेतर तेलका दाम ६) और २५ गोलीका १) कुल ७) सात ही रुपयेकी तो बात है ।

महाविष्णु तेल

इस तेल की मर्मलिशसे वायु रोग फौरन ही भागता है, शरीर वज्रवत् मजबूत होता और दूटी हुई हड्डी भी जुड़ जाती

२० हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

है, जो लोग वातरोगामें अनेक दवाएं करके हार गये हों और निराश होकर दवा करना छोड़ दिया हो, वह हमारा “महाविष्णु तेल” व्यवहार कर देखें। ईश्वर आरोग्य प्रदान करेगा। इस तेलसे आदमी तो आदमी जानवरों की भी वातव्याधि नष्ट हो जाती है। (दाम १६) रुपया सेर।

महामाषादि तैल।

“इस तेलसे आक्षेपक, पक्षाघात, उरुस्तंभ, अपबाहुक, हाथ काँपना, सिर काँपना, एकांग वात, हनुग्रह—ठोड़ी का जकड़ जाना, मन्यास्तंभ,—गर्द नका रह जाना, कानका दर्द, सिर और कानों की मन्दता, लंगड़ापन और गुब्रसी वात आदि समस्त वायु रोग नाश होते हैं। यह तेल वात रोगों का दुश्मन है। अनेक गठियाके रोगी, जो “नारायण तेल”से भी आराम न हुए इस “महामाषादि तेल”से आराम हो गये। एक ही दवा सभी रोगियों को आराम कर देती, तो महर्षि लोग एक-एक रोगकी सैकड़ों दवाएं नहीं निकालते। फिर भी हम जोरसे कहते हैं कि, अब्बल तो हमारा “नारायण तेल” ही वात रोगोंमें फेल नहीं होता, यदि देवात कभी “नारायण तेल” “काम न दे, तो “महा-विष्णु तेल” या “महामाषादि तेल”से तो रोग को भगना होगा ही। (मूल्य १६) रुपया सेर। आध पाव का दाम २)

प्रसारिणी तैल।

इस तेलका जैसा नाम है वैसा ही गुण है। यह सुकड़ी हुई खाद्यओंके फैलानेमें रामवाण है। इसको मालिशसे कफके

हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । २१

रोग, कुबड़ा करनेवाली वायु, पाँगला करनेवाली वायु, गुप्तसी वायु, अर्दिंत—लकवा, पश्चाघात—फालिज, हनुग्रह—जबाड़े बन्द होना, पीठ, कमर और गर्दनकी जकड़न तथा विषम बात ये सब निश्चय ही आराम हो जाते हैं। यह तेल भी गुड़श्यों और वैद्योंके पास रहने योग्य है। (दाम १६) रुपया सेर ; आध पावका दाम २)

बला तेल ।

यह तेल गर्भ चाहनेवाली स्त्रियों, धातुक्षीण पुरुषों, राह चलनेसे थके हुए मनुष्यों और प्रसूता—बच्चा जननेवाली औरतोंके लिये अमृत है। यह तेल वायु रोगोंको भी नाश करता है। जिनके गर्भ न रहता हो, जिनकी धातु क्षीण होती हो और जिन्होंने बच्चा जना हो, वे इस बला तेलको अवश्य व्यवहार करें। यह तेल राजा-महाराजाओं और अमीरोंके घरोंमें ज़रूर रहना चाहिये। अगर कोई इसे अच्छी हालतमें लगाता रहे, तो कभी भी धातुक्षीण न हो। (मूल्य १६) रुपया सेर। आधपावका दाम २)

विषगर्भ तेल ।

यह तेल बहुत गर्भ है। इस तेलके लगानेसे बात रोग निश्चय ही नाश हो जाता है। जब किसी तेलसे बात रोग न जाय, इस तेलको सेवन कीजिये। (दाम १२) रु० सेर। आधपाव का दाम १॥)

२२ हारदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरितन रोड, कलकत्ता ।

वातगजकेशरी अर्क ।

इस अर्कके पीनेसे समस्त वात रोग, बदनका दर्द और सूजन फौरन ही आराम होते हैं । आमवात, लकवा-अद्वित, पक्षाघात-फालिज, हाथी-पाँव, वीर्य दोष और रजके दोषों पर यह अर्क रामवाण है । गठिया वगैरः रोग तो चार दिनोंमें ही हूमन्तरको तरह उड़ जाते हैं । दाम १ बोतलका २)

हिमसागर तैल ।

इस तैलसे उष्णवात या गरमबादीके समस्त रोग, हाथ-पैर के तलवे जलना, शरीरसे चिनगियाँ सौ उठना, शरीरका सूखना, लकवा और गठिया आदि वात रोग निश्चय ही आराम होते हैं । उष्णवात रोगकी तो यह एक ही दवा है । दाम १६) रु० सेर । आधपावका दाम २)

धातुपुष्किर चूर्ण ।

जिनकी धातु पतली है, जिनकी धातु पेशाबके आगे पीछे या पाखाना फिरते समय कौंखनेसे गिर जाती है, जिनको स्तन-दोष होते हैं, जिनको स्त्री-प्रसंगमें रुकावट न होनेसे आनन्द नहीं आता,—जिनको बाते याद नहीं रहती ; जिनका चित्त डाँवाडोल रहता है,—उनके लिये यह चूर्ण मन लगाकर पशु-परहंतेके साथ कम-से-कम ४० या ६० दिन खाना चाहिये । इसीसे उनका धातु रोग आराम होकर, वीर्य पत्थरके समान स्फेद हो जायगा । चेहरे पर तेज और कान्ति आवेगी ; बल-

हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । २३

वीर्य और मांस बढ़ेगा । यह दवा ३० सालकी आज्माई हुई है । हजारों रोगों बंगे हुए हैं ; पर फ़ायदा उन्हें ही करता है, जो दो या तीन महीने तक खाते हैं । जो वैद्य १०१२० दिनमें धातु रोग आराम करनेकी बात कहते हैं, वे भगवान् से न डरकर झूठ बोलते हैं । हमें झूठ बोलकर पैसा नहीं ठगना । दाम ४० दिनके खाने योग्य ८० मात्राका दाम १५)

कामदेव चूर्ण ।

यह चूर्ण यथा नाम तथा गुण है । इसके २३ महीने खानेसे खा-प्रसंगकी इच्छा खूब ज़ियादा होती है । इससे धातु-क्षीणता जाती और स्मरन-शक्ति बढ़ती है । यह कामदेवको उत्तेजित करनेमें रामवाण है । थोड़े दिनोंकी नामदी भी इससे अवश्य जाती रहती है ।

अगर ४० दिन धातुपुष्टिकर खाकर, ८० दिन या ६० दिन यह कामदेव चूर्ण सेवन किया जाय, तो सोनेमें सुगन्ध हो जाय । यह चूर्ण भी ३० सालका परीक्षित है । कभी फेल नहीं होता, पर देरमें लाभ दिखाता है । हाँ, आराम शक्तिया और पक्का करता है । दाम ४० दिन योग्य चूर्णका २०)

कान्ता गर्वहारि चूर्ण । (Banar)

इस चूर्णसे बरस दो बरसका प्रमेह या धातुक्षीणता नाश होकर, वीर्य खूब मुष्ट होता है । वीर्यको गाढ़ा और बलवान बनानेमें यह चूर्ण रामवाण है । खूब परीक्षा हो चुकी है ।

२२ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

वातगजकेशरी शर्क ।

इस शर्कके पीनेसे समस्त वात रोग, बदनका दर्द और सूजन फौरन ही आराम होते हैं । आमवात, लकवा-अर्द्धित, पक्षाघात-फालिज, हाथी-पाँव, वीर्य दोष और रजके दोषों पर यह शर्क रामवाण है । गठिया वगैरः रोग तो चार दिनमें ही छूमत्तरकी तरह उड़ जाते हैं । दाम १ बोतलका २)

हिमसागर तैल ।

इस तेलसे उष्णवात या गरमबादोके समस्त रोग, हाथ-पैर के तलवे जलना, शरीरसे चिनगियाँ सी उठना, शरीरका सूखना, लकवा और गठिया आदि वात रोग निश्चय ही आराम होते हैं । उष्णवात रोगकी तो यह एक ही दवा है । दाम १६) २० सेर । आधपावका दाम २)

धातुपुष्टिकर चूर्ण ।

जिनकी धातु पतली है, जिनकी धातु पेशाबके आगे पीछे या पाखाना फिरते समय काँखनेसे गिर जाती है, जिनको खम-दोष होते हैं, जिनको स्त्री-प्रसंगमें रुकावट न होनेसे आनन्द नहीं आता,—जिनको बाते याद नहीं रहती ; जिनका जित डाँवाडोल रहता है,—उनके लिये यह चूर्ण मन लगाकर प्रथम-पहलूके साथ कम-से-कम ४० या ६० दिन खाना चाहिए । इसीसे उनका धातु रोग आराम होकर, वीर्य पत्थरके समान समेद हो जायगा । चेहरे पर तेज और कान्ति आवेगा ; बल-

हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। २३

वीर्य और मांस बढ़ेगा। यह दवा ३० सालकी आजुमाई हुई है। हज़ारों रोगों बंगे हुए हैं; पर फ़ायदा उन्हें ही करता है, जो दो या तीन महीने तक खाते हैं। जो वैद्य १०।२० दिनोंमें धातु रोग आराम करनेकी बात कहते हैं, वे भगवान् से न डरकर झूठ बोलते हैं। हमें झूठ बोलकर पैसा नहीं उठाना। दाम ४० दिनेके खाने योग्य ८० मात्राका दाम १५)

कामदेव चूर्ण।

यह चूर्ण यथा नाम तथा गुण है। इसके २३ महीने खानेसे खा-प्रसंगकी इच्छा खूब ज़ियादा होती है। इससे धातु-क्षीणता जाती और स्तम्भन-शक्ति बढ़ती है। यह कामदेवको उत्तेजित करनेमें रामवाण है। थोड़े दिनोंकी नामदीं भी इससे अवश्य जाती रहती है।

अगर ४० दिन धातुपुष्टिकर खाकर, ८० दिन या ६० दिन यह कामदेव चूर्ण सेवन किया जाय, तो सोनेमें सुगन्ध हो जाय। यह चूर्ण भी ३० सालका परीक्षित है। कभी फैल नहीं होता, पर देरमें लाभ दिखाता है। हाँ, आराम शक्तिया और पक्का करता है। दाम ४० दिन योग्य चूर्णका २०)

कान्ता गर्वहारि चूर्ण। (Banar)

इस चूर्णसे बरस दो बरसका प्रमेह या धातुक्षीणतः नाश होकर, वीर्य खूब मुष्ट होता है। वीर्यको गाढ़ा और बलवान बनानेमें यह चूर्ण शैमन्त्राण है। खूब परीक्षा हो चुकी है।

२४ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

कभी फैल नहीं होता। जाड़ेमें अगर यह चूर्ण निरोग पुरुष खावे, तो उनको वह आनन्द आवे, जिसकी तारीफ नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि, इसके खानेवाला चाहे तो स्त्री-प्रसंग भी कर सकता है, उसका बल कभी न घटेगा। हम हरेक नौजवानसे, जो धातु-भस्म या रस खाना नहीं चाहते, जाड़ेमें ४ महीने लगातार इस चूर्णको खानेकी जोरसे विफारिश करते हैं। 'दाम ४० दिन योग्य दवाका २०।

कामिनीद्रावक चूर्ण (Harshash)

इस चूर्ण की एक-एक गोला सवेरे-शाम दूधके साथ खानेसे, चार महीनेमें, वह बल-पुरुषार्थ आता और स्त्री-प्रसंगकी ऐसी शक्ति आती है कि, तारीफ नहीं कर सकते। अगर कोई इसे बारह महीने लगातार खाले तब तो...के समान हो प्रसंग करने लगे। इससे प्रमेह, धातु-क्षीणता, पेशाब का तेल-सा होना वगैरः रोग भी जाते हैं। मूल्य ४० दिन-योग्य चूर्णका १०। जो बहुत खर्च कर नहीं सकते, वे इसे सेवन करके हमारी आजमूदा दवाका चमत्कार देखें।

शतावरी धृत।

इस घीसे बीयें खूब बढ़ता और धातु पुष्ट होती है। अरुठपित्त नाश करनेमें भा यह घी रामवाण है। अगर हमारे "कामदेव चूर्ण" या "कामिनीद्रावक चूर्ण" के साथ-साथ, किसी

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समय, इसकी भी एक मात्रा चाटी जाय, तब तो सोनेमें सुगन्ध हो जाय । मूल्य आध पाव घी का २॥

मृगनाभ्यादि वटी ।

कैसी ही धातु कम होगई हो या सूख गई हो, धातु की कमीसे खी-इच्छा न होती हो, अथवा वीर्य की कमीसे नामदीं होगई हो—इन गोळियोंसे अवश्य मरी हुई धातु भी जी उठेगी । अगर जाड़ेमें ये गोळियाँ कम-से-कम १६० भी सेवन कर ली जायँ, तो हम छाती ठोक कर कहते हैं, कि बहुत ही कम प्रसंग की इच्छा होनेवाले को भी प्रबल इच्छा होने लगेगी । आजमूदा दवा है । मूल्य ८० गोली का १०)

नपुंसक सज्जीवन वटी

ये गोळियाँ जैसा इन का नाम है वैसी ही हैं । नामदेके लिए जिन्दा करनेवाली हैं । इनके जाड़ेमें ३४ महीने लगा-तार खानेसे बेतहाशा प्रसंगेच्छा होती है । शामको दो या चार गोळियाँ खाठेनेसे अपूर्ण स्वर्गीय आनन्द आता है और प्रसंगमें डबल स्तम्भन होता है । शरीरमें कुर्ती और दूनी ताकत मल्लूम होती है । ये गोळियाँ कभी फेल नहीं होतीं । जिन्हें कोई रोग नहीं है, उन्हें भी जाड़ेमें ये गोळियाँ खानो चाहियँ । उप-रोक्त रोग नाश करनेके सिवा, ये गोळियाँ प्रमेह, शरीर का दर्द, जकड़न, गठिया, लकवा, बहुमूत्र, खाँसो और श्वासमें भी खूब लाभ दिखाती हैं । जिन लोगोंको प्रमेह, बहुमूत्र, खाँसो, श्वास

२६ हारदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।

और गठिया प्रभृति की शिकायत हो, उन्हें ये गोलियाँ सवैरे-शाम खाकर मिश्री-मिला गरम दूध पीना चाहिये। भगवत् की दयासे अपूर्व चमत्कार दोखेगा। ये गोलियाँ अवीष मोती, कस्तूरी और केशर आदि कीमती चीजोंसे बनती हैं। ध्यान रहे, ये गोलियाँ गरम मिज्ज ज वालोंको फायदा नहीं करतीं ; जिनका मिज्ज सदा या बादीका है, उन्हें रामवाण है। जिन्हें गरम चीजे हानि करती हों और शीतल चीजे फायदा करती हों, वे इनको मँगाकर रुपया बर्बाद न करें । हाँ, जिन्हें गरम पदार्थोंसे सुख होता हो, वे ही उन्हें मँगावें। दाम १५० गोलियोंका ४)

लवंगदि चूर्ण ।

इस चूर्णके सेवन करनेसे राजयक्ष्मा तो निश्चय ही नाश होता ही है। उसके सिवा जू काम भी आराम हो जाता है। जिन को बारहों महीने जुकाम बना रहता है, वह इस चूर्णको कम-से-कम १ महीने सेवन करें। उन्हें बड़ा लाभ होगा, जुकामसे पीड़ा छूट जायगा, साथ ही ताकत भी आवेगी। आजकल धातुपर गरमी पहुँचनेसे लोगोंको जुकाम बहुत सताया करता है; हमने इस चूर्णसे अनेक रोगी आराम किये हैं। जिन लोगोंको क्षय है, लूँसों है और कफके साथ खून आता है, उनके लिए भी यह चूर्ण परीक्षित है। इन सब रोगोंके अलावा, इससे सदासे होनेवाला तमक श्वास-श्वास नलोंके सुकड़नेसे, हक-हक-कर