शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१८ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।
इसीसे आध सेर तेलकी बात लिखी है । एक दिन हमारे एक आत्मीयकी छाती, पीठ और कमरमें, रातके २ बजे, ऐसा दर्द उठा, कि रोगी तड़फने लगा । जान पड़ता था, रोगी दिन निकलनेसे पहले ही ख़तम हो जायगा । हमने पूछा—“नारायण तेल है ?” जवाब मिला—“हाँ—!” हमने कहा—“चार आदमी सारे शरीरमें मालिश करो ।” एक पीठमें, एक छातीमें, एक हाथोंमें और एक पैरोंमें नारायण तेल मलने लगा । एक आदमी आगपर रुई गरम करता और दूसरा सेक करता था । परमात्माकी दयासे दो घण्टेमें रोगी एक-दम आराम होकर सो गया । देखनेसे मालूम हुआ कि, दो घण्टेमें तीन छटाँक तेल शरीरमें पेवस्त हो गया । अगर हम उस समय तेलका ढालच करते—कोरी चुपड़ा-चुपड़ी करते, तो रोगीको आराम न होता और रोगीके घरवालोंकी श्रद्धा “नारायणतेल”से उठ जाती । भयङ्कर रोगोंमें हर दिन कम-से-कम एक छटाँक “नारायण तेल” सारे शरीरमें रमाना चाहिये, तब तत्काल चमत्कार दीखता है ।
बरसात और शीतकालमें शरीरमें यकायक तकलीफ़ बढ़ी हो जाती है । लोगोंको अचानक लकवा या फालिज मारना है । जबतक डाक्टर वैद्य आते हैं, रोग डाकगाड़ीकी चालसे बढ़ जाता है । पीछे आराम करनेमें बड़ी कठिनाई होती है । अगर घरमें आध सेर “नारायण तेल” और “योगराज गुगल” या “सतीरगजकेसरी बटो” मौजूद हों तो, रोग फौरन दब जावे ।