भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। १३

सौ-सौ रोग की एक-एक दवा बेचकर लोगोंको बेमौत मार रहे हैं; पर दुःख है, कि लोग ज़रा भी नहीं समझते। हमारे यहां “विक्रितसावन्द्रोदय”के लेखक, वयोवृद्ध बाबू हरिदास जी की बनाई हुई, निश्चय ही फल दिखाने वाली दवाएँ तैयार रहती हैं। आप उन्हें जाड़ेमें सेवन कीजिये और स्त्री-भोगका सच्चा आनन्द लूटिये। नीचे लिखी हुई दवाएँ परमोत्तम हैं :-

१-अम्रक भस्म १००० पुटी ४०) रु० तोले।

२-वंगेश्वर १० आँचकी ८) रु० तोले।

३-मृगनाभ्यादि बटी ८० गोली १०) रु०।

४-धातु पुष्टिकर चूर्ण ८० मात्रा १५) रु०।

५-कामदेव चूर्ण ८० मात्रा २०) रु०।

६-चन्द्रनादि तैल १ सेर १६) रु०।

७-तिला नं० १—एक शीशी ५)

सेवन-विधि

ऐसी चीज़ें बहुत करके, जाड़ेमें, सेवन करनी चाहिये। पहले ४० दिन धातुपुष्टिकर चूर्ण, फिर ४० दिन कामदेव चूर्ण, फिर ४० दिन वंगेश्वर या मृगनाभ्यादि बटी और फिर ४० दिन १००० आँचको अम्रक सेवन करनी चाहिये। जितने दिन ये दवाएँ खाई जायँ, उतने दिन “चन्द्रनादि तैल” शरीरमें लगाना चाहिये और जननेन्द्रिय की नसोंका दोष दूर करनेको कम-से-कम १ शीशी तिला लगाना चाहिये। इसो तरह ५ महीना हमारी दवा