भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 515, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 515

१६ हरिदास पण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता।

पत्र व्यवहार गुप्त।

सभो रोगियोंको चिड़ियाँ गुप्त रखो जाती हैं। कोई किसीकी भोतरी बात जान नहीं सकता; इसलिए अपना हाल दिल खोलकर, साफ हिन्दीभाषा और नागरी अक्षरोंमें लिखना चाहिये।

हमारी अठ्यर्थ महौषधियाँ।

हमारी नीचे लिखी दवाएं आज तक कभी फेल नहीं हुईं और न होंगी, वशर्त्त कि रोगका ठीक निदान करके सेवनकी जायँ। हम हर एक भाईसे प्रार्थना करते हैं कि, वह हमारी नीचे लिखी हुई चीजोंको परीक्षा करे और सदा इनसे काम ले। ग्रहस्थीमें इनकी रोज दरकार रहती ही है। इससे देशका धन देशमें रहेगा और ५) रु० का काम २) रु० में होगा। विश्वास कीजिये, हमने आज तक, अपने जीवनमें, किसीकी १ पाई भी धोखा देकर नहीं ली और न आगे वैसी इच्छा है। जीवन क्षण-भंगुर है, ईश्वरके पास जाना है, उसे अपने कर्मोंका जवाब देना है। अपनी १ पैसेकी चीज़का दाम १) रु० रखनेमें पाप नहीं—पर फूटो और बेकाम चीज़ देकर पैसा लेनेमें घोर पाप है। पाठक, हमारे इन शब्दोंपर विश्वास करके नीचे लिखा चीज़ अवश्य मँगावें और आज्ञावें—

नारायण तेल।

यह तेल अस्सी वायु रोग नाश करनेमें समवाण है। हम इसे अपनी युक्तिसे दवाएं घटा-बढ़ाकर बनाते हैं , इसको