भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कंपनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता । २७

आनेवाला श्वास, प्रमेह, क्षयी, धातुक्षय, छातीका दर्द, दिलका घबराना, गलेके रोग और अस्चि ये सब रोग नाश होते हैं। जिन लोगोंको बुढ़ापेने घेर लिया है; बुढ़ापेके मारे कफ और वायु घेरे रहते हैं, कमर और शरीरके जोड़ोंमें दर्द रहता है, खाँसो चलती है और दम चढ़ता है, वे बुद्ध हमारे कहनेसे इस चूर्णको नियमसे महीने-दो-महीने सेवन करके, इसका अपूर्व गुण देखें। अगर आपका मित्राज गरम नहीं है, उम्रमौसे रोग नहीं है, तो निश्चय ही इससे लाभ होगा। चार महीने शामको इसे और सवेरे "बुद्धसुधा चूर्ण" सेवन करें, तो बूढ़ोंके सारे रोग नाश होकर, सफेद बाल काले होनेके सिवा , जवानी का और सब आनन्द आजावे। दाम लंबगादि चूर्णकी १ शीशीका १)

बुद्धसुधा चूर्ण ।

यह चूर्ण विधारा और असगन्ध आदि २१ उत्तमोत्तम दवाओंसे बनता है। इसके सेवन करनेसे प्रमेह वगैरः धातु-रोग नाश होकर, शरीर खूब पुष्ट और बलवान होता है। जिनको प्रमेह है और जिनका शरीर मोटा-ताज़ा नहीं है, उनको इसे जाड़ेमें चार महीने खाकर आनन्द देखना चाहिये। ४० बरससे ६०७० बरसकी उम्र वाले इस अमृतको जाड़ेमें अवश्य सेवन किया करें। मूल्य ४० दिनकी दवाका ११)

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