भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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२८ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।

सुधारस ।

इस रससे समस्त प्रमेह नाश होते हैं और गिरती हुई धातु फौरन रुकती है। यह रस प्रमेह पर कभी फेल नहीं होता। इसमें अवीथ मोती, शिलाजीत, वंगभस्म और चाँदीके वर्क आदि क्रोमती चीजें गिरती हैं। जिन्हें मिकदारमें बहुत दवा खाना पसन्द न हो, वे लोग इसे अवश्य सेवन करें। अमीरोंके लायक अमृत है। मूल्य २१ दिनकी दवाका १५)

प्रमेहान्तक चूर्ण ।

इसके सेवन करनेसे बीसों तरहके प्रमेह निश्चय हो नाश हो जाते हैं। साथ ही बल-वीर्य और कान्ति बढ़ती है, शरीर खूब तैयार होता है, धातु गाढ़ी और पुष्ट होती है और स्त्री-प्रसंगमें स्वर्गीय आनन्द आता है। जो शुरुस इसे ६० दिन लगातार सेवन कर लेता है, स्त्री उसकी गुलाम हो जाती है। जिनकी धातु पेशाबकी राहसे गिरती है, प्रसंगकी इच्छा नहीं होती या रक्तावट नहीं होती, वे इसे अवश्य सेवन करें। ३० सालकी आजमूदा दवा है। फेल होना तो जानती ही नहीं। मूल्य ४० दिनकी दवाका १५)

वसन्तकुसुमाकर रस ।

जो प्रमेह किसी दवासे आराम नहीं होता, वह "वसन्त-कुसुमाकर"से आराम होता है। सभी प्रमेही इससे आराम होते