भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। २६

हैं। कोई अभागा और बद्किस्मत ही आराम न हो तो न हो। इसकी एक-एक मात्रा "शहद" के साथ खानेसे कफ और वातज प्रमेह आराम होते हैं तथा "शर्बत चन्दन" के साथ खानेसे पित्तज प्रमेह और अरुपित्तादि रोग आराम होते हैं। गरम मिज़ाजवालोंको २ चाँबल और ताक़तवर एवं सदै मिज़ाजवालोंको दो रत्तीकी मात्रा है। इसमें सोनेकी भस्म, मोती भस्म, मूँ गाभस्म, निश्चन्दू सहस्रपुटो अम्रक भस्म, फ़ोलाद-भस्म और बंगेश्वर वगैरः सभी कीमती चीज़ें पड़ती हैं; इसलिये सभी वैद्य इसमें बढ़िया चीज़ें नहीं डालते। मोती असल ४०) या ४५) रुपया भरी मिलते हैं। वैद्य लोग १८) या २०) रु० भरीका कूड़ाकरकट डालकर "वसन्त कुसुमाकर" बना लेते हैं, तभी तो वह फायदा नहीं करता और वैद्यककी बदनामी होती है। हम हरेक चीज़ लोभ-लालच त्यागकर बनाते हैं, क्योंकि अबल तो जगदीशकी दयासे रुपयोंकी कमी नहीं, फिर मुँह-माँगे दाम मिलते हैं। १ तोलेका मूल्य ५०)।

चन्द्रप्रभावटी ।

• ये गोळियाँ भी प्रमेह नाश करनेमें प्रसिद्ध हैं, पर अब आदमियोंका बल और मिज़ाज और तरहका हो जानेसे शास्त्रोंमें लिखी हुई विधिसे बनाई हुई फायदा नहीं करतीं। देवाओंमें उलटफेर करनेसे फायदा करती है। हमने इनको अनेक बार आजमाया की है। ये बीसों तरहके प्रमेह, मूषकन्द, ५०)