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शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। ३७

कम नहीं मिलता। फिर इसे पारे और गंधक की कजलीके योगसे फूंकनेमें पूरी मिहनत होती है। शोधनेमें और फूंकनेमें डीज़ भी जाता है। अब आप ही सोचिये, अगर ४०) रुपये भरीके भी मोती लाकर फूँके जायें, तो भस्म किस भाव बेची जाय। आज-कलके भावमें ७०) रुपये भरीसे कममें असल मोतीभस्म मिल नहीं सकती। जो लोग ३०) रु० भरी मोती-भस्म बेचते हैं, वह असल गुणकारक मोती कैसे लगा सकते हैं? हम चीज़ असल बनाते हैं, तभी हमारी दवा गुण करती है। जिसे असल चीज़ लेने होगी, वह आप हो पूरी कीमत देगा। हम ख़राब चीज़ देकर बदनामी क्यों ले? दाम ६०) और ७०) तोले।

मोती-भस्मकी मात्रा आधी रस्तीसे २ रस्ती तक है। ताक़त के लिए १ रस्ती मोती-भस्म "सितोप्लादि चूर्ण" और चाँदीके बर्कोंके साथ सेवन करनी चाहिये। १ रस्ती मोती-भस्म, १ चाँदी का बर्क, १ छोटी हलायची, १ रस्ती वंगेश्वर और १ रस्ती सार—इन सबको शहद या शर्बत अनारमें मिलाकर चाटनेसे महा बलहीन भी बलवान हो जाता है। जिस आदमीको अधिक वीर्यपातके कारण उबर हो, उसे यही मात्रा देनेसे पन्द्रह मिनटमें आराम हो जाता है। देर करनेसे रोगी मर जाता है।

शुद्ध गंधक।

अगर गंधक अच्छी तरह शुद्ध की गई हो, तो परम लाभ करती है। असल शुद्ध गंधक दस्तावर, बुहापा, मृत्यु, खुजली,