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शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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३८ हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता ।

विसर्प, कोढ़, पारैके दोष, क्षय, तिल्ली और वात-कफ नाशक है। प्रमेहकी यह बड़ी ही उत्तम दवा है। गरीब लोग प्रमेहमें हमारे कहनेसे इस अमृत-समान गरीबी दवाको सेवन करें। ई माहोसे तोले भर तक गंधक पुराने गुड़में मिलाकर खाने और ऊपर से धारोण्य दूध पीनेसे बीसों प्रमेह नष्ट हो जाते हैं। कड़वे तेलूके जैसा पेशाब साफ हो जाता है। शहदमें मिलाकर लगातार खानेसे मन्दाग्नि भाग जाती है। कैसा ही नेत्र-रोग हो, छे महीने तक शुद्ध गंधक खानेसे आराम हो जाता और गिद्धकी सी दृष्टि हो जाती है। गंधक शोधनेमें मिहन्त और खर्च पड़ता है, इसलिये लोग दूधमें शोधकर बेचते हैं। हमारे पास असल शोधो हुई गंधक तैयार रहती है, जो फौजन चमत्कार दिखाती है। मूल्य (१) आना तोले।

शुद्ध शिलाजीत ।

शिलाजीतके अगर सारे गुण लिखें तो एक पोथा भर जाय। आज-कल इसके इतिहास जगह-जगह देखनेमें आते हैं। जिनको शिलाजीतकी परख भी नहीं आती, वे भी इसको धड़ाधड़ बेच कर शिलाजीतका नाम बदनाम करते हैं। आज-कल शिलाजीतकी जगह लंगूरोंका गू बेचा जाता है। अगर आपको शिलाजीतकी परख, शिलाजीतमें दगाबाज़ी, शिलाजीत शुद्ध करने और उसे इस्तेमाल करनेकी तैयारी मालूम करनी हों, तो हमारा “चिकित्साचन्द्रोदय”-चौथा भाग देखिये।