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शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हरिदास एण्ड कम्पनी, २०१ हरिसन रोड, कलकत्ता। ३६

शिलाजीत बुढ़ापे और मृत्युको जीतने वाला, वमन, कम्प-वायु, बीसों प्रमेह, पथरी, शर्करा, रोगमसाना, सोझाक, कफक्षय, श्वास, बाड़ी बवासीर, पीलिया, मृगी, उन्माद, सूजन, कोढ़, ठुमि, हाथी-पाँव और गुल्म इत्यादिको नाश करता है। हमने इसे प्रमेह और मेद रोग ( मोटा होनेका रोग ) पर अनेक बार आजमाया है। इन रोगों पर रामवाण है। जिनका प्रमेह किसी तरह नहीं जाता अथवा जो मुट्पापेसे दुखी हैं, वे हमारा शुद्ध शिलाजीत सेवन करें। शिलाजीत जितना ही अच्छी तरह शोधा जायगा, उतना ही ज़ियादा गुण करेगा। शहद, पीपर, शुद्ध शिलाजीत और १००० पुटी अम्रक मिलाकर सेवन करनेसे बीसों प्रमेह शस्त्रियां आराम हो जाते हैं। शुद्ध शिलाजीत, बंगरुस्म, छोटी इलायची, और बंसलोचनकी गोलियाँ खाकर, दूध पीनेसे प्रमेह, बहुमूत्र, कमजोरी और धातुरोग निश्चय ही जाते रहते हैं। बहुत ही उत्तम असल और शुद्ध शिलाजीतका मूल्य १।) तोले।

गिलोयका सत् ।

• आजकँल असल गिलोयका सत् भी बड़ी मुश्किलसे मिलता है। गिलोयका सत् सस्ती चीज़ है, पर असल हो तो अमृत है। इस सत्त्से बवासीर, कमजोरी, अर्द्धि, कय, मीलिया, जीर्णज्वर, दाह, ज्वर, कोढ़, क्षय, मन्दाग्नि, गुल्म, प्रदर, हिचकी, कामला, प्रमेह और वायुरोग निश्चय ही आराम होते हैं, बशर्ते

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