शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 57, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( ४४ )
अपनी स्त्री पर पूरा भरोसा रहता है कि, उसकी प्यारी चीज़ोंको, खासकर उसकी सबसे प्यारी चीज़ अपने तईं, वह दक्षित रखेगी—जाने न देगी। वह अपने ऐसे विश्वासी मंत्रीके भरोसे बेफिक और निर्भय होकर काम पर जाता है। वह अपने शत्रुओंमें फिज़ूल-खर्ची नहीं करती—सभी कामोंमें किफायतसे काम लेती है। पतिको जिस चीज़की ज़रूरत होती है, उसे ही ठाकर हाज़िर कर देती है। सदा उसका भला चाहती है। उसका रस्ती-भर नुकसान होने नहीं देती। कभी भी उसे शोकार्त् या रज्जीदा होने नहीं देती। अगर पतिको शोक होता है तो हर लेती है और अपना विश्वास बढ़ाती रहती है। —बिशप होएन।
संसारमें कोई भी चीज़ सुन्दरी, पवित्रात्मा, विनोदशीला और नारीसे अधिक मनोहर नहीं। —हण्ट।
स्त्रीकी आँखोंमें ईश्वरने दीपक जला रखे हैं, ताकि भूले-भटके पुरुषोंको उन चिरागोंकी रोशनीमें स्वर्गकी राह दीख जावे। —विल्किंस।
मामूली नौजवानोंको स्त्रियोंमें कोई गुण न दीखता हो तो न दीखता हो, पर मेरी नज़रमें तो वह देवीसे कम नहीं।
—वासिङ्गटन आयर्विंग
जब तक पुरुष पर आकृत्त नहीं आती, तब तक उसे अपनी स्त्रीके गुणोंका पता नहीं लगता। विपद् आने पर उसे मालूम हो जाता है कि, उसकी स्त्री सखी देवी है। —बेलजर
कण्टकपूर्ण शाखाको फूल सुन्दर बना देते हैं और