शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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उसकी मीठी आवाज़ हृदयके तापको मिटा देती और सुखे हृदय को फिरसे हराभरा और तरोताज़ा कर देती है । —गैली नाइट ।
स्त्रीकी मर्यादा उसके अपरिचित रहनेमें, उसकी प्रभा उसके पतिके सम्मानमें और उसका सुख उसके कुटुम्बके मङ्गल या कल्याणमें है । —कसो ।
देखा गया है कि, प्रकृतिने नारियोंको स्वयं चिन्ता और कृश भोगनेको पैदा नहीं किया । उसने उन्हें हमारी चिन्ताओंके काम करनेको बनाया है । —गोल्डसिथ ।
स्त्रियाँ जिन्होंने अपना विश्वास खो दिया है, उन फरिश्तोंके समान हैं जिन्होंने अपने पंख गँवा दिये हैं । डाक्टर वाल्टर स्मिथ ।
जॉय नामक एक पाश्चात्य चिन्ता कहते हैं :—“But for women, our life would be without help at the outset, without pleasure in its course and without consolation at the end” अगर स्त्रियाँ न हों, तो पुरुष की बाल्यावस्था असहाय और यौवन आनन्द-विहीन हो जाय तथा बुढ़ापेमें कोई आश्वासन देनेवाला न हो । मतलब यह है कि, पुरुषको हर अवस्थामें स्त्रीकी ऊहरत है । ठीक है, जिसके एक सती साध्वी नारी हो, और चाहे कुछभी न हो, वह परम सुखी है ।
गोथे महोदय कहते हैं—“A hearth of one's own and a good wife are worth gold and pearls.” निजका घर और साध्वी स्त्री सोने और मोतियोंके बराबर हैं ।
बेकन महोदय भी कहते हैं :—“Wives are young