भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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men's mistresses, companion for middle age, and old men's nurses" स्त्रियां युवावस्थामे पत्नियोंका, मध्यावस्था में सहचारिणियोंका और बुढ़ापेमें धायोंका काम देती हैं ।

स्पेनवालोंमें एक कहावत है—“To him who has a good wife, no evil can come which he cannot bear.” जिस पुरुषके भली स्त्री है, उस पर ऐसी कोई विपत्ति नहीं आ सकती, जिसे वह सह न सके ।

बहुत से अनजान कहेंगे कि, यूरोपियन लोग तो स्त्रियोंके गुलाम होते ही हैं । उनकी गाई स्त्री-महिमा हमारे किस मस्तरफ की ? ऐसोके सन्तोषके लिए, हम अपने हिन्दू-शास्त्रों से ही चन्द श्लोक उद्धृत करते हैं । वे आँखें खोलकर देखें, हमारे यहाँ ही नारी जातिकी कैसी महिमा गाई गई है :—

महाभारतके आदि पर्वमें लिखा है :—

अर्द्धे भायां मनुष्यस्य, भायां श्रेष्ठतमः सखा ।

भायां मूलं त्रिवर्गस्य, भायां मूलं तरिष्यतः ॥

सखायः प्रविक्तेषु, भवन्त्येताः प्रियम्बदाः ।

पितरो धर्मकार्येषु, भवन्त्यातस्य मातरः ॥

भायां वन्तः क्रियावन्तः, समायां गृहमेधिनः ।

भायां वन्तः प्रमोदन्ते, भायां वन्तः श्रियान्विताः ॥

कान्तोरुषपि विश्रामो, जनस्याध्वनिकस्य वै ।

यः सदारः स विश्वास्यस्तस्माद्वाराः परागतिः ॥