भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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भूतशक्तिक

है मन ! उस कामिनी के पुष्ट स्तनों, मनोहर जीवों और चन्द्रमुख को देखकर क्यों व्याकुल होते हैं ? अगर तुम उसके कटोर कुचों और मनोहर जीवों को गौरः का ज्ञानन्द लेना चाहते हो, तो परोपकार-पुण्य सम्भव करो ; अर्थात् सुन्दरी भूतनयनी पुण्य-कर्म करने से मिलती है ।

(पृष्ठ ४३)

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