शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 145, कुल 526 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयोऽध्यायः ५६
कर करे। अन्यथा (उचित नियुक्ति न होने से) ये दोनों भयङ्कर रूप से नाशकारी होते हैं।
मुद्रां विनाऽखिलं राजकृत्यं कर्तुं क्षमं सदा ।
कल्पयेद्युवराजार्थमौरसं धर्मपत्निजम् ॥ १४ ॥
स्वक्रनिष्ठं पितृव्यं वाऽनुजं वाऽग्रजसंभवम् ।
पुत्रं पुत्रीकृतं दत्तं यौवराज्येऽभिषेचयेत् ॥ १५ ॥
युवराज के कार्य तथा अभिषेकार्थ युवराज के अधिकारियों का निर्देश—
जो राजा का मोहर लगाने के अतिरिक्त सभी राजकार्य को सदा करने के लिये समर्थ होता है, ऐसे युवराज-पद के लिये धर्मपत्नी में उत्पन्न औरस (साक्षात् अपना) पुत्र चुनना चाहिये अभाव में क्रम से अपना छोटा भाई, चाचा, छोटा भाई और बड़े भाई का पुत्र, पुत्रीकृत (जिसको पुत्र के समान मान लिया जाय) पुत्र अथवा दत्तक पुत्र को चुनकर युवराज नियुक्त करना चाहिये।
क्रमादभावे दौहित्रं स्वस्रीयं वा नियोजयेत् ।
स्वहितायापि मनसा नैतान्संकर्षयेत्क्वचित् ॥ १६ ॥
क्रम से पूर्वोक्त के अभाव में दौहित्र (लड़की का लड़का) या भानजा को युवराज बनाना चाहिये और अपने हित के लिये कभी मन से भी इन सबों को कष्ट न पहुँचाना चाहिये।
स्वधर्मनिरताञ्छूरान् भक्तान्नीतिमतः सदा ।
संरक्षयेद्राजपुत्रान् बालानपि सुयत्नतः ॥ १७ ॥
लोलुभ्यमानास्तेऽर्थेषु हन्युरेनमरक्षिताः ।
रक्ष्यमाणा यदिच्छिद्रं कथंचित्प्राप्नुवन्ति ते ॥ १८ ॥
सिंहशावा इव घ्नन्ति रक्षितारं द्विपं द्रुतम् ।
राजपुत्रा मदोद्भूता गजा इव निरंकुशाः ॥ १९ ॥
पितरं चापि निघ्नन्ति भ्रातरं स्वितरं न किम् ।
मूर्खो बालोऽपीच्छति स्म स्वाम्यं किं नु पुनर्युवा ॥ २० ॥
और स्वधर्म में निरत, शूर, राजभक्त, नीतिशास्त्रज्ञ राजपुत्रों की भलीभाँति सदा रक्षा (रखवाली) करे चाहे वे बालक हों तो भी उनकी विशेष यत्न से रक्षा (रखवाली) करे अर्थात् राजा इन से अपनी प्राणरक्षा करता रहे क्योंकि यद्यपि इनकी रक्षा भलीभाँति की जा रही है तो भी यदि ये किसी प्रकार का छिद्र (मौका) पा जाते हैं और उस समय उनके ऊपर किसी का पहरा नहीं रहता है तो राज्य के लोलुप होने से रक्षक राजा को मार डालते हैं जैसे सिंह के बच्चे रक्षक हाथी को भी शीघ्र मार डालते हैं। और मद से मतवाले निरंकुश हाथी के समान राजपुत्र जब पिता को या भाई को भी मार डालते