भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१०८ | शुक्रनीतिः

तथा न क्रीडयेत् कैश्चित् कलहाय भवेद्यथा ।
विनोदेऽपि शपेन्नैव ते भार्या कुलटाऽस्ति किम् ॥ ३१२ ॥
**कलहकारक क्रीडा आदि करने का निषेध—**ऐसी क्रीडा अर्थात् मनो-विनोद की बात नहीं करनी चाहिये जिससे झगड़ा खड़ा हो जाय। जैसे विनोद में भी ऐसा नहीं कहना चाहिये कि—क्या तुम्हारी स्त्री कुलटा (व्यभिचारिणी) है !।

अपशब्दांश्च नो वाच्या मित्रभावाच्च केष्वपि ।
गोप्यं न गोपयेन्मित्रे तद्गोप्यं न प्रकाशयेत् ॥ ३१३ ॥
**मित्र के प्रति कर्त्तव्याकर्त्तव्य विषयों का निर्देश—**किसी व्यक्ति के लिये मित्रभाव से भी अपशब्दों (कटुवचनों) का प्रयोग करना उचित नहीं है। मित्र से गोप्य विषय को न छिपाये और उसके गोप्य विषय को कहीं प्रकाशित न करे।

बैरीभूतोऽपि पश्चात् प्राक्कथितं वापि सर्वदा ।
विज्ञातमपि यद्दौष्ट्यं दर्शयेत्तन्न कर्हिचित् ॥ ३१४ ॥
प्रतिकर्तुं यतेतैव गुप्तः कुर्यात् प्रतिक्रियाम् ।
कारणवश मित्र के बैरी बन जाने पर भी मित्रतावस्था में पहले कही हुई गुप्त बातों को एवं जाने हुये उसके दोषों को भी कहीं पर सदा प्रकाशित न करे और गुप्त होकर उसकी दुर्भावना को दूर करने का यत्न करे और दूर भी करे।

यथार्थमपि न ब्रूयाद् बलवद्विपरीतकम् ॥ ३१५ ॥
दृष्टं त्वदृष्टवत् कुर्याच्छ्रुतमप्यश्रुतं क्वचित् ।
**बलवान् के प्रति विपरीत बातें न करने का निर्देश—**बलवान् पुरुषों की विपरीत अर्थात् ग्लानिजनक कोई बातें यदि यथार्थ भी हों तो भी उन्हें उसके सामने न कहे, एवं जो देखी भी हों उन्हें अनदेखा कर दे और जो कहीं सुनी भी हों उन्हें अनसुनी कर दे।

मूकोऽन्धो बधिरः खञ्जः स्वापत्काले भवेन्नरः ॥ ३१६ ॥
अन्यथा दुःखमाप्नोति हीयते व्यवहारतः ।
**मनुष्य को आपत्ति पड़ने पर कर्त्तव्य कर्मों का निर्देश—**मनुष्य को अपने ऊपर आपत्ति आ जाने पर किसी प्रवल पुरुष की बुरी सत्य बात कहने के लिये मूक (गूंगा) बन जावे, बुराई देखने के लिये अन्धा, बुराई सुनने के लिये बहरा एवं बुराई करने के लिये दौड़-धूप करने में लंगड़ा बन जावे अर्थात् किसी भांति से बुरा लगनेवाला व्यवहार न करे, यदि ऐसा नहीं करेगा तो दुःख पायेगा और व्यवहार से गिर जायेगा।

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