शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 336, कुल 526 में से
संदर्भ में पढ़ें२५० | शुक्रनीतिः
स्वस्वमुष्टेश्चतुर्थोऽशो ह्यङ्गुलं परिकीर्तितम् । तदङ्गुलैर्द्वादशभिर्भवेत् तालस्य दीर्घता ॥ ८५ ॥
अंगुष्ठादिकों के प्रमाणों का निर्देश— अपनी २ मुष्टि के चतुर्थांश के बराबर १ अंगुल का प्रमाण कहा हुआ है। और १२ अंगुल की लम्बाई १ ताल की मानी गई है।
वामनी सप्तताला स्यादष्टताला तु मानुषी । नवताला स्मृता दैवी राक्षसी दशतालिका ॥ ८६ ॥
वामनी, मानुषी, दैवी, राक्षसी प्रतिमाओं के लक्षण— जो प्रतिमा ७ ताल की प्रमाण ऊँची है वह 'वामनी' ८ ताल की 'मानुषी' ९ ताल की 'दैवी' और १० ताल प्रमाण की ऊँची 'राक्षसी' कहलाती है।
सप्ततालाद्युच्चता वा मूर्तीनां देशभेदतः । सदैव स्त्री सप्तताला सप्ततालश्च वामनः ॥ ८७ ॥
स्त्री देवता तथा वामन भगवान की प्रतिमा की ऊँचाई का प्रमाण— अथवा देशभेद से उपर्युक्त ७ ताल आदि प्रमाण की ऊंचाई प्रतिमाओं की मानी गई है। और सदा स्त्री देवता की प्रतिमा ७ ताल की ऊँची और वामन भगवान की ७ ताल की ऊँची बनानी चाहिये।
नरो नारायणो रामो नृसिंहो दशतालकः । दशतालः स्मृतो बाणो बलीन्द्रो भार्गवोऽर्जुनः ॥ ८८ ॥
नर-नारायणादि की प्रतिमाओं की ऊँचाई का प्रमाण— नर, नारायण, राम और नृसिंह की प्रतिमा १० ताल की ऊंची, एवं बाणासुर, बलि, इन्द्र, परशुराम तथा अर्जुन की भी प्रतिमा १० ताल ऊंची कही हुई है।
चण्डी भैरववेतालनरसिंहवराहकाः । क्रूरा द्वादशतालाः स्युर्ह्ययशीर्षादयस्तथा ॥ ८९ ॥ ज्ञेया षोडशताला तु पैशाची वाऽऽसुरी सदा ।
चण्डी आदि की प्रतिमाओं की ऊंचाई के प्रमाण— चण्डी, भैरव, वेताल, नरसिंह, वराह तथा हयग्रीव आदि क्रूर देवताओं की प्रतिमा १२ ताल ऊंची एवं पैशाची या आसुरी प्रतिमा १६ ताल ऊंची सदा बनाने को कही गई है।
हिरण्यकशिपुर्वृत्रो हिरण्याक्षश्च रावणः ॥ ९० ॥ कुम्भकर्णोऽथ नमुचिर्निशुम्भः शुम्भ एव हि । एते षोडशतालाः स्युर्महिषो रक्तबीजकः ॥ ९१ ॥
असुरों की प्रतिमा की ऊंचाई का प्रमाण— हिरण्यकशिपु, वृत्रासुर, हिरण्याक्ष, रावण, कुम्भकर्ण, नमुचि, निशुम्भ, शुम्भ, महिषासुर तथा रक्तबीज इन सब असुरों की प्रतिमायें १६ ताल की ऊंची होती हैं।