भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 415, कुल 526 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 415

चतुर्थाध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३२५

शिक्षितं व्यूहकुशलं विपरीतमशिक्षितम् ॥ १२ ॥ **सार-असार तथा शिक्षित-अशिक्षित सेनाओं के लक्षण—**भली भांति युद्ध करने के लिये उत्सुक रहनेवाळी सेना को 'सार' और इसके विपरीत रहनेवाळी को 'असार' कहते हैं । व्यूह-रचना में कुशल सेना को 'शिक्षित' और इससे विपरीत को 'अशिक्षित' कहते हैं ।

गुल्मीभूतं साधिकारि स्वस्वामिकमगुल्मकम् । दत्तास्त्रादि स्वामिना यत् स्वशस्त्रास्त्रमतोऽन्यथा ॥ १३ ॥ **गुल्मीभूत, अगुल्मक, दत्तास्त्रादि तथा स्वशस्त्रास्त्र सेनाओं के लक्षण—**सेनापति के साथ रहनेवाळी सेना को 'गुल्मीभूत' और बिना सेनापति के स्वतन्त्र रहकर लड़नेवाली को 'अगुल्मक' कहते हैं । स्वामी जिसको अस्त्रादि दिये हों उस सेना को 'दत्तास्त्रादि' और इसके विपरीत जिसके पास अपना निजी शस्त्रास्त्र हों उसे 'स्वशस्त्रास्त्र' कहते हैं ।

कृतगुल्मं स्वयंगुल्मं तद्वच्च दत्तवाहनम् । आरण्यकं किरातादि यत् स्वाधीनं स्वतेजसा ॥ १४ ॥ **कृतगुल्म, स्वयंगुल्म, दत्तवाहन और आरण्यक सेनाओं के लक्षण—**तथा कृतगुल्म (स्वामी ने सेनापति से युक्त सेना में जिसकी गणना की है), स्वयंगुल्म (अपनी इच्छा से गुल्म का अधिपति बना हुआ सैन्य) तथा दत्तवाहन सेना भी होती है । अपने तेज से स्वाधीन रहनेवाळी कोळ भिल्लादिकों की सेना को 'आरण्यक' कहते हैं ।

उत्सृष्टं रिपुणा वापि भृत्यवर्गे निवेशितम् । भेदाधीनं कृतं शत्रोः सैन्यं शत्रुबलं स्मृतम् ॥ १५ ॥ उभयं दुर्बलं प्रोक्तं केवलं साधकं न तत् । **शत्रुबल के तथा दुर्बल सेना के लक्षण—**१—जिसमें शत्रु के द्वारा निकाले हुये सैनिक वेतन देकर रख लिये गये हों अथवा २—जो शत्रु की सेना भेद-नीति से अपने अधीन कर ली गई हो, उसे 'शत्रुबल' कहते हैं । ये दोनों प्रकार की सेनायें दुर्बल कही हुई हैं क्योंकि इनपर विश्वास नहीं किया जा सकता है । ये केवल नाममात्र को होती हैं इनसे युद्ध-कार्य वस्तुतः नहीं चलाया जा सकता है ।

समैनियुद्धकुशलैर्व्यायामैर्नतिमितस्तथा ॥ १६ ॥ वर्धयेद्बाहुयुद्धार्थं भोज्यैः शारीरकं बलम् । **सेना के शारीरिक बल बढ़ाने के उपाय—**बाहुयुद्ध में कुशल अपने बराबर वालों के साथ कुश्ती लड़ा कर तथा व्यायाम कराकर एवं गुरुजनों को प्रणाम

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित) · पृष्ठ 415, कुल 526 में से · BharatKosha