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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 451

चतुर्थोऽध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३६५

सङ्घातवान् यथा वेणुर्निबिडैः कण्टकैर्वृतः ॥ २४२ ॥
न शक्यते समुच्छेत्तुं वेणुः सङ्घातवांस्तथा।

**सन्धि के अवसरों का तथा उनसे लाभ का निर्देश—**जिस प्रकार से घने कांटा से घिरा हुआ बांस के समूह को कोई काट या उखाड़ नहीं सकता है, उसी प्रकार से म्लेच्छों से सन्धि किये हुये सहायवान राजा को भी कोई नहीं पछाड़ सकता है। अर्थात् राजा को अपने पास के भले-बुरे सभी राजाओं से मेल रखना चाहिये ऐसा करने से कोई शत्रु उसको परास्त नहीं कर सकता है।

सन्धिञ्चातिबले युद्धं साम्ये यानं तु दुर्बले ॥ २४३ ॥
सुहृद्भिराश्रयः स्थानं दुर्गादिभजनं द्विधा।

अति प्रबल शत्रु के साथ सन्धि, समान बलवाले के साथ युद्ध, दुर्बल शत्रु पर या न (युद्ध के लिये आक्रमण) व मित्र राजाओं के साथ आश्रय और दुर्गादि में दो जगह स्थान-सेना की स्थापना करना उचित होता है।

बलिना सह सन्धाय भये साधारणे यदि ॥ २४४ ॥
आत्मानं गोपयेत् काले बहुमित्रेषु बुद्धिमान्।

यदि राजा को बहुत से शत्रुओं से समानभाव से भय उपस्थित हो जाय तो उनमें जो अधिक बलशाली हो उसके साथ बुद्धिमानी के साथ समयानुसार सुलह करके अपनी रक्षा करनी चाहिये।

बलिना सह योद्धव्यमिति नास्ति निदर्शनम् ॥ २४५ ॥
प्रतिवातं हि न घनः कदाचिदपि सर्पति।

बलवान के साथ युद्ध करना उचित होता है, इसका उदाहरण कहीं भी नहीं मिलता है। क्योंकि देखा जाता है कि मामूली बादल कभी भी हवा के विपरीत नहीं ठहर सकता है।

बलीयसि प्रणमतां काले विक्रमतामपि ॥ २४६ ॥
सम्पदो न विसर्पन्ति प्रतीपमिव निम्नगाः।

जो बलवान शत्रु के समक्ष सिर झुकाते हैं और समय अच्छा आने पर फिर उसी से युद्ध करने लगते हैं। ऐसे राजाओं की संपत्ति उससे कभी विपरीत नहीं होती है अर्थात् कभी चलायमान नहीं होती है। जैसे नदियां कभी विपरीत नहीं बहती हैं।

राजा न गच्छेद्दु विश्वासं सन्धितोऽपि हि बुद्धिमान् ॥ २४७ ॥
अद्रोहसमयं कृत्वा वृत्रमिन्द्रः पुराऽवधीत्।

**विग्रह करने योग्य पुरुष के लक्षण—**बुद्धिमान राजा सन्धि किये हुये भी शत्रु का विश्वास न करे। क्योंकि प्राचीनकाल में द्रोह न करने की प्रतिज्ञा-

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