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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 468
१८२शुक्रनीतिः

घोराग्निभयवित्रस्तं वृष्टिवातसमाहतम् ॥ ३४९ ॥
एवमादिषु जातेषु व्यसनैश्च समाकुलम् ।
स्वसैन्यं साधु रक्षेत्तु परसैन्यं विनाशयेत् ॥ ३५० ॥

**सेना के उपद्रुत होने पर लड़ने का निर्देश—**बहुत दूर से चलकर आने से थकी हुई, भूख-प्यास के मारे परेशान हुई, रोग, दुर्भिक्ष तथा बर्फ के ओलों की मार से पीडित, डाकुओं से लूटी-मारी गई, कीचड़, धूल तथा बाढ़ से छथपथ हुई, व्याकुल तथा हांफती हुई, सोई हुई, भोजन करने में व्यग्र, स्वल्प संख्यावाली (सेना की छोटी टुकड़ी), दुर्गतिग्रस्त, भयंकर आग की लपटों से डरी हुई, वर्षा तथा आंधी से घबराई हुई, इत्यादि दुर्घटनाओं के उत्पन्न होने से अत्यन्त व्याकुल हुई अपनी सेना की तो भलीभांति से रक्षा करे किन्तु यदि शत्रु की ऐसी सेना हो तो उसे नष्ट कर दे।

बलस्य व्यसनानीह यान्युक्तानि मनीषिभिः ।
मुख्यो भेदो हि तेषां तु पापिष्ठो विदुषां मतः ॥ ३५१ ॥

**सेना में फूट डालने में पाप का निर्देश—**इस शास्त्र में विद्वानों ने जितने सेना के विषय में दुःखदायक उपायों को कहा है, उनमें भेद (परस्पर फूट डालना) को ही मुख्य एवं अत्यन्त पापपूर्ण सबों ने माना है।

भिन्ना हि सेना नृपतेर्दुःखसंदेह। भवत्युत ।
मौला हि पुरुषव्याघ्र ! किमु नानासमुत्थिता ॥ ३५२ ॥

**फूट जानेवाली सेना के दुःखदायिनी होने का निर्देश—**हे पुरुष-श्रेष्ठ ! नाना प्रकार के नवीन सैनिकों से भरी हुई भी सेना जब फूट पड़ जाने से इस संसार में राजा के लिये दुःखदायिनी हो जाती है तब भला पुरानी खास सेना में फूट पड़ने पर क्या कहना है, वह तो अत्यन्त दुःखदायिनी हो जाती है।

उपायान् षड्गुणं मन्त्रं शत्रोः स्वस्यापि चिन्तयेत् ।
धर्मयुद्धैः कूटयुद्धैर्हन्यादेव रिपुं सदा ॥ ३५३ ॥

**सामादि का ध्यान रखते हुये युद्ध करने का निर्देश—**राजा सदा शत्रु के तथा अपने द्वारा कृत सामादि उपायों की एवं सन्ध्यादि षड्गुणों तथा मन्त्रणा का ध्यान रखता हुआ धर्मयुद्ध या कूटयुद्ध के द्वारा जैसे भी हो शत्रु का विनाश करे।

याने सपादभृत्या तु स्वभृत्यान् वर्धयन्नृपः ।
स्वदेहं गोपयेद् युद्धे चर्मणा कवचेन च ॥ ३५४ ॥

**शत्रु पर चढ़ाई करते समय सेना को तनख्वाह बढ़ाने का निर्देश—**शत्रु के ऊपर चढ़ाई करने के समय अपने नौकरों या सैनिकों की तनख्वाह में सवाई