शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| मङ्गलाचरण तथा ग्रन्थोपक्रम | १ | भूमि के मानभेदों का निर्देश | ३० |
| नीतिशास्त्र का उपक्रम | ,, | राजधानी बनाने योग्य प्रदेश | ३२ |
| नीतिशास्त्र-प्रशंसा | २ | राजोचित भवन का निर्देश | ३३ |
| राजा का नीतिशास्त्र-ज्ञान में प्रयोजन | ३ | राजोचित दुर्ग बनाने का निर्देश | ३६ |
| राजा की काल-कारणता का निर्देश | ४ | राजसभा बनाने का निर्देश | ,, |
| धर्म की प्रशंसा | ५ | मन्त्री आदि के भवन का निर्देश | ३७ |
| राजा के सात्त्विकादि तीन भेद | ,, | सेना तथा प्रजावर्गों के स्थान | ,, |
| सुगति-दुर्गति भेद से प्राक्तन कर्म की कारणता | ६ | धर्मशाला-निर्माण का निर्देश | ३८ |
| राजा के देवांश होने का निर्देश | ११ | राजमार्गादि-निर्माण का निर्देश | ,, |
| ७ गुणों से युक्त राजा की प्रजा-रंजकता का निर्देश | १२ | धर्मशाला की व्यवस्था | ४० |
| इन्द्रियजय की आवश्यकता | १६ | राजाओं के दैनिक कृत्य | ४१ |
| विनाश के चार कारण शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध | ,, | प्रहरियों का कर्त्तव्य | ४२ |
| जैसे शब्द-विषय के द्वारा | ,, | राजा के आदेशों की घोषणा | ४३ |
| रूप-विषय द्वारा | १७ | राजाओं के कर्त्तव्य | ४५ |
| रस-विषय द्वारा | ,, | विषादि से दूषित अन्नादि-परीक्षा | ४७ |
| गन्ध-विषय द्वारा | ,, | शिकार खेलने का वर्णन | ४८ |
| द्यूतादिव्यसन के दोषों का निर्देश | ,, | राजा के सम्बन्धी आदियों का राजनिर्धारित कर्त्तव्य | ५० |
| आठ प्रकार के राजा के व्यवहार का निर्देश | २० | परिषद् की व्यवस्था का निर्देश | ५१ |
| राजा के दोष-गुण का निर्देश | ,, | राजा को राजचिह्न रखने का निर्देश | ५२ |
| आन्वीक्षिकी आदि के लक्षण | २४ | राजा के कर्त्तव्य | ५३ |
| मनोहर वचन बोलने का निर्देश | २६ | राजा को प्रतिवर्ष देश के अधिकारियों के निरीक्षण का निर्देश | ५४ |
| राजा के सामन्तादि भेदों का निर्देश | २८ | राजा के पारलौकिक कार्य | ५६ |
| एकाकी राजा का राज्यकार्य करने की दुष्करता का निर्देश | ५७ |
शुक्र ०