शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ४८ )
अधिकारी उसकी देख-रेख करें और एक स्थायी व्यक्ति उसका नित्य-व्यवस्थापन करे। इस व्यक्ति को 'पान्थ-शालाधिप' कहा गया है। इस पान्थ-शाला में आए व्यक्ति के स्थानादि का विवरण रहना¹ चाहिए।
इसी प्रकार अन्यान्य प्रमुख विषयों का भी विशद् वर्णन इस ग्रन्थ में मिलता है, यहाँ तो केवल कुछ ही विषयों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है, जो अपर्याप्त है। अतः समस्त ग्रन्थ का विधिवत् अध्ययन ही इस अंश में पर्याप्त हो सकता है।
शुक्र-नीति के संस्करण
उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट है कि शुक्र-नीति अपने विषय का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। अतएव इस ग्रन्थ का कई बार प्रकाशन हुआ। प्रामाणिक संस्करण के रूप में हम ऑपर्ट ( Oppert ) महाशय के द्वारा मद्रास से प्रकाशित तथा जीवानन्द विद्यासागर के संस्करण को ले सकते हैं। प्राध्यापक विनय कुमार सरकार ने 'सेक्रेड बुक्स ऑफ हिन्दू-सीरीज' में अंग्रेजी अनुवाद भी इस ग्रन्थ-रत्न का प्रकाशित किया है। सभी संस्करणों में यह ग्रन्थ चार अध्यायों में विभक्त है।
ऐसे अपूर्व ग्रन्थ का हिन्दी व्याख्यान भी परमावश्यक था, विशेषतः आज के भारतवर्ष में। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए यह संस्करण पाठकों के सामने प्रस्तुत है। यद्यपि 'वेंकटेश्वर प्रेस, बम्बई' से आचार्य मिहिरचन्द्र जी की हिन्दी व्याख्या (अनुवाद) के साथ भी इसका प्रकाशन हुआ है तथापि उसकी हिन्दी आज की दृष्टि से बहुत उपयोगी नहीं है। हमें विश्वास है कि विद्वान् पाठकगण इस संस्करण की कुछ त्रुटियों की उपेक्षा कर विद्वान् व्याख्याकार तथा धैर्य एवम् उत्साह से सम्पन्न प्रकाशक की कामना की पूर्ति करने में सानुग्रह दृष्टि-कोण अपनायेंगे जिससे इस ग्रन्थ-रत्न का अग्रिम संस्करण भी यथा-सम्भव परिष्कार के साथ शीघ्र ही प्रस्तुत हो सके।
वाराणसी ⎬
वि० सं० २०२५ ⎭
विदुषामनुविधेयः—
श्रीनारायण मिश्रः
१. वही १।२६९-७१ ॥