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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
आरामाधिपति के लक्षण८०सत्य तथा परोपकार की श्रेष्ठता तथा इससे युक्त राजकर्मचारी रखने का निर्देश८७
गुहाद्यधिपति के लक्षण,,संपूर्ण पापों से हिंसा तथा असत्य की प्रबलता तथा इनसे युक्त भृत्यों को न रखने का निर्देश८८
देवाध्यक्ष के लक्षण८१सद्भृत्य के लक्षण तथा कृत्य,,
दानाध्यक्ष के लक्षण,,द्वारपाल के कर्तव्यों का निर्देश,,
सभासद के लक्षण,,राजपार्श्ववर्ती दण्डधारियों का कर्त्तव्य,,
सत्राधिप के लक्षण,,भृत्य का राजसमीपावस्थान करने पर कर्त्तव्य८९
परीक्षक के लक्षण८२राजा के पक्ष की पुष्टि करने का निर्देश,,
साहसाधिप के लक्षण,,राजाज्ञा से विवादियों के मत को युक्ति से बोलने का निर्देश,,
ग्रामाधिप के लक्षण,,राजा से स्वकार्य-निवेदन-प्रकार तथा जोर से हंसने आदि का निषेध,,
कर वसूल करनेवाले के लक्षण,,हितकारी सेवक का कृत्य९०
लेखक के लक्षण,,राजा को किसी भी मिष से प्रजा को पीड़ित न करने का निर्देश९१
द्वारपाल के लक्षण८३समझदारों को अपने २ कार्यों में नियुक्त रहने का निर्देश,,
चुङ्गी लेनेवाले के लक्षण,,स्वामी के गुप्त कार्य के प्रकाश करने का निषेध,,
तपोनिष्ठ के लक्षण,,राजवेशभूषा-धारण की नकल करने का निषेध९२
दानशील के लक्षण,,राजा की विरक्ति तथा अनुरक्ति का ज्ञान रखने एवं तदनुसार त्याग तथा ग्रहण का निर्देश,,
श्रुतज्ञ के लक्षण,,विरक्त राजा के लक्षण,,
पौराणिक के लक्षण,,अनुरक्त राजा के लक्षण९३
शास्त्रविद् के लक्षण,,
ज्योतिर्विद् के लक्षण८४
मान्त्रिक के लक्षण,,
वैद्य के लक्षण,,
तान्त्रिक के लक्षण,,
अन्तःपुर के योग्य पुरुष के लक्षण,,
परिचारक के लक्षण,,
जासूस के लक्षण८५
दण्डधारी-आसा-वल्लमधारी के लक्षण,,
गायकाधिप के लक्षण,,
वेश्या के लक्षण,,
वेश्या-भृत्य के लक्षण८६
वैतालिक तथा शिल्पज्ञों को पास में रखने का निर्देश,,