शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| राजा से प्रदत्त भूषणादि धारण का निर्देश | ९३ | निश्चितान्यस्वामिक संचित धन के भेद | १०६ |
| स्वामी के प्रति भृत्य के कर्त्तव्य | ९४ | औपनिध्य-याचित-औत्तमर्णिक के लक्षण | ,, |
| आपस में भृत्यों के कर्त्तव्य | ९५ | अज्ञातस्वामिक के लक्षण | १०७ |
| राजा तथा भृत्य के परस्पर अच्छा व्यवहार करने का निर्देश | ,, | स्वत्वविनिश्चित के भेद | ,, |
| डाकू के समान राजा के लक्षण | ,, | साहजिक के लक्षण | ,, |
| प्रच्छन्न चोर के लक्षण | ,, | अधिक के लक्षण | ,, |
| बालक भी राजपुत्र का तिरस्कार का निषेध | ९६ | संचित धन के लक्षण | ,, |
| लेख्यों के भेदों का निर्देश | १०१ | संचित धन के भेद | ,, |
| लेख के दो भेदों का निर्देश | १०२ | पार्थिवसंज्ञक आय के भेद | १०८ |
| जयपत्रक के लक्षण | ,, | चलसंज्ञक आय के लक्षण | ,, |
| आज्ञापत्र के लक्षण | ,, | विभागानुसार आय-व्यय के व्याप्य-व्यापक का निर्देश | ,, |
| प्रज्ञापनपत्र के लक्षण | ,, | व्यय के भेदों एवं पुनरावर्त्तक के लक्षण | ,, |
| शासनपत्र के लक्षण | १०३ | निधि, उपनिधि आदि व्यय के लक्षण | १०९ |
| प्रसादलिखित के लक्षण | ,, | स्वत्वनिवर्त्तक के भेद | ,, |
| भोग-कर-उपायन-पुरुषावधिक और कालावधिक पत्रों के लक्षण . | ,, | ऐहिक तथा पारलौकिक व्यय के भेद | ,, |
| विभागपत्र या भागलेख्य के लक्षण | ,, | प्रतिदान, पारितोषिक और वेतन-व्यय के लक्षण | ,, |
| दानपत्र के लक्षण | ,, | उपभोग्य के लक्षण | ,, |
| क्रयपत्र के लक्षण | १०४ | भोग्य व्यय के लक्षण | ११० |
| सादिलेख्य के लक्षण | ,, | पारलौकिक व्यय के चार भेद और उनके लक्षण | ,, |
| संवित्पत्र के लक्षण | ,, | आय-व्यय-लेखक के कर्त्तव्य | ,, |
| ऋणलेख्य के लक्षण | ,, | अवशिष्ट आय के विविध भेद | १११ |
| शुद्धिपत्र के लक्षण | ,, | मान-उन्मान-परिमाण संख्या के लक्षण | ,, |
| सामयिक लेख्यपत्र-लक्षण | ,, | लोकव्यवहारार्थ द्रव्य तथा धन के लक्षण | ,, |
| संमतिसंज्ञक पत्र के लक्षण | ,, | मूल्य की परिभाषा | ,, |
| क्षेमपत्र के लक्षण | १०५ | ||
| वेदनार्थक पत्र के लक्षण | ,, | ||
| आय-व्यय लेख्य के लक्षण | ,, | ||
| राजाओं के आय-व्ययादिक के लक्षण | ,, | ||
| आय के भेद | १०६ | ||
| संचित आय के भेद | ,, |