शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| शिल्पी को कभी मूर्तियों की वृद्ध-सदृश कल्पना न करने का निर्देश | २६८ | यज्ञ-सदृश सभा के लक्षण | २७३ |
| राजा को उक्त देवताओं का स्थापन करके प्रतिवर्ष उनका उत्सव करने का निर्देश | ” | सभा में सुननेवालों में वैश्यों के रहने का निर्देश | ” |
| मानहीन और भग्न प्रतिमा को रखने का निषेध | ” | सभा में जाने का नियम | ” |
| प्रजाकृत उत्सवों का सदैव पालन करने का निर्देश | ” | सभा में निर्णय करनेवालों का क्रम-निर्देश | ” |
| राजा को प्रजा-सुख से सुखी और प्रजा-दुःख से दुखी होने का निर्देश | २६९ | निर्णयकों का तारतम्य | ” |
| शत्रु, दुष्ट तथा प्रजापालन के लक्षण | ” | निर्णय करने में समर्थ पुरुष के लक्षण | २७४ |
| शत्रुनाश और दुष्टनिग्रह का लक्षण | ” | धर्म का लक्षण | ” |
| व्यवहार-लक्षण | ” | अनुचिन्तन-प्रकार का निर्देश | ” |
| राजा को प्राड्विवाकादि के साथ व्यवहारों को देखने का निर्देश | ” | दश साधनों का निर्देश | ” |
| पक्षपात के ५ कारणों का निर्देश | २७० | यज्ञतुल्य सभा के द्वितीय लक्षण का निर्देश | २७५ |
| राजा के अनिष्टकारक हेतुओं का निर्देश | ” | दशाङ्गों के कर्मों का पृथक् २ निर्देश | ” |
| स्वयं कार्य-निर्णय न कर सकने पर योग्य ब्राह्मण को नियुक्त करने का राजा को निर्देश | ” | गणक तथा लेखक के लक्षण | ” |
| ब्राह्मण न मिलने पर क्षत्रियादि नियुक्त करने का एवं शूद्र को न नियुक्त करने का निर्देश | २७१ | धर्माधिकरण के लक्षण का निर्देश | ” |
| सभासद के लक्षण | ” | राजसभा में प्रवेश करने का प्रकार | २७६ |
| राजा के द्वारा निर्णयायोग्य पुरुषों के लक्षण | ” | सभा में राजा के कृत्यों का निर्देश | ” |
| राजा को द्विजाति आदिकों का स्वयं निर्णय न करने का निर्देश | २७२ | राजा को पूर्ण विचारपूर्वक सब धर्मों की रक्षा करने का निर्देश | ” |
| देश-जाति-कुलधर्मों का पालन करने का निर्देश | ” | ||
| देश-जाति-कुलधर्मों के उदाहरणों का निर्देश | ” | ||
| कलियुग में महादण्ड के योग्यों का निर्देश | २७७ | ||
| न्यायादिकों के समय का निर्देश | ” | ||
| मनुष्यमारणादिकों में समय के नियम में अभाव का निर्देश | ” |