शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| कार्य में प्रवृत्ति तथा छिद्र (दोष) के कारणों का निर्देश | ४०९ | सैनिकों के शौर्यवर्धक उपायों को करने का निर्देश | ४११ |
| निर्दोष तथा अभिमत ही कार्य करने का निर्देश | " | युद्धकार्य से अन्य में सैनिकों की नियुक्ति का निषेध | " |
| दशग्रामाधिपादिकों का विचरण करने के प्रकारों का निर्देश | " | व्यवहार में विपन्न होने पर धनिक या किसान की रक्षा करने का निर्देश | " |
| श्रेष्ठ तथा हीन पुरुष के संमान में न्यूनाधिक्य का निषेध | ४१० | धनी सैनिक का वेतन व भत्ता के विषय में विचार | " |
| उत्तमादि गृह-भूमि के प्रमाणों का निर्देश | " | सैनिकों के धन की आत्मवत् रक्षा करने का एवं जालसाज धनिकों का धन हरण करने का निर्देश | ४१२ |
| अधिकारी पुरुषों को ग्राम के बाहर रहने एवं सैनिकों को बिना राजकार्य के ग्राम-प्रवेश के निषेध का निर्देश | ४११ | मूल से चौगुना सूद ले चुकने पर धनी को कुछ न देने का निर्देश | " |
| सैनिकों ग्रामवासियों को पीड़ा न पहुँचाने एवं ग्रामवासियों को सैनिक के साथ व्यवहार न करने का निर्देश | " | टीकाकार-परिचय | " |
| श्लोकानुक्रमणिका | ४१३ |