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शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

श्रीमती हिमांशु द्विवेदी द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

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(2) पात्रों का वर्गीकरण :

पात्रो का वर्गीकरण कई आधारो पर किया गया है। सामान्यतया पात्र दो वर्गों मे रखे जाते है, (1) पुरुष पात्र, (2) स्त्रीपात्र। शुकसप्तति के समस्त पात्रों को प्रमुख रूप से चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है -

(1) समस्त पुरूष पात्र, (2) समस्त स्त्री पात्र, (3) पशु एवं पक्षी श्रेणी के पात्र, (4) भूत, पिशाच आदि। यद्यपि कथाओं में प्रधानता स्त्री और पुरुष पात्रों की है।

(क) इतिवृत्त के आधार पर :

कथावस्तु किसी भी रचना का मूलाधार है। कथावस्तु के स्वरूप के अनुसार ही उसके अन्तर्गत आने वाले समस्त पात्रों का स्वरूप निर्धारित होता है। कथावस्तु भी कई प्रकार की होती है दिव्य, अदिव्य अर्थात् मर्त्य और दिव्यादिव्य। दिव्य कथावस्तु के पात्र दिव्ययोनि के, अदिव्य में पृथ्वी लोक के तथा दिव्यादिव्य के अन्तर्गत पृथ्वीलोक से सम्बन्धित ऋषि, मुनि इत्यादि पात्र आते हैं।

शुकसप्तति के अधिकांश पात्र मर्त्य अर्थात् अदिव्य श्रेणी के हैं। कुछ पात्र जैस-गन्धर्व आदि दिव्य कोटि के है। जिनका परिचय आगे दिया जायेगा।

(ख) घटनाओं के आधार पर :

कथावस्तु की आवश्यकता एवं रसपरिपोषण की दृष्टि से अनेक प्रकार की घटनाओं की संरचना कवि करता है। जैसी घटनायें होती हैं उसी के अनुसार पात्रों का भी सृजन किया जाता है। कुछ घटनाओं का विषय राजवर्गीय होता है। कुछ प्रजावर्गीय अर्थात लोक या समाज से सम्बन्धित होती हैं। कुछ आर्षवर्गीय पात्रों को लेकर के उपदेशात्मक होती हैं। इस प्रकार घटनाओं के आधार पर पात्रों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है- (1) राजवर्गीय, (2) प्रजावर्गीय (लोक एवं समाज), (3) आर्षवर्गीय।

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