शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन
Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan
श्रीमती हिमांशु द्विवेदी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(ब) शुकसप्तति के प्रमुख पात्रें का परिचय :
(1) मुख्य पात्र :
(क) मदन विनोद :
मदनविनोद धीरोदात्त श्रेणी का नायक है। यद्यपि इस ग्रथ के अन्तर्गत मदन विनोद का प्रारंभिक जीवन विषयासक्त कुपुत्र का है किन्तु बाद मे सन्मार्ग का अवलम्ब कर देशान्तर जाना एवं अर्थ सचय इत्यादि करके लौटना आदि कार्य उसे धीरोदात्त नायक की श्रेणी मे स्थापित करते है। शुकसप्तति का यह प्रमुख पात्र है, यद्यपि कवि ने इसका अत्यल्प शब्दो में वर्णन किया है एव अन्य कथाओं के विकास मे इसका योगदान भी नगण्य है तथापि अन्य कथाओ को जन्म देने मे इस पात्र की अभावमूलक भूमिका अवश्य है।
मदनविनोद हरिदत्त नामक सेठ का पुत्र है जो विषयासक्त किन्तु पिता के प्रयास से एव शुक के उपदेश से कुमार्गगामी वह पुत्र माता-पिता के प्रति विनयशील बन जाता है। तदन्तर माता-पिता को प्रणाम कर, अनुज्ञा लेकर और पत्नी से पूछकर देशान्तर को चला जाता है।
मदनविनोद एक बुद्धिमान एवं चतुर पति है। वह एक पत्नीव्रती है। उसे इस बात की आशङ्का रहती है कि उसकी अनुपस्थिति में उसकी शोक-ग्रस्त पत्नी वियोग के दिन किस प्रकार काट पायेगी। उसके कुमार्गगामी होने का भय भी उसे है अतः वह शुक एवं सारिका जो कि एक कुशल, उपदेशक के रूप मे काव्य में वर्णित हैं उन पर अपनी पत्नी की रक्षा का भार उसे सौंप जाता है।
मदनविनोद की ऐतिहासिकता संदिग्ध है क्योंकि इस पात्र का इतिहास में कहीं कोई वर्णन नही मिलता। यह कवि द्वारा एक कल्पित पात्र है। जो अपरोक्ष रूप में प्रमुख पात्र के रूप मे ग्रंथ मे वर्णित है।
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