भारतकोश
शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

श्रीमती हिमांशु द्विवेदी द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

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विविध :

"दानी दिनेश.", "करूणा कपोती च युवती च" (भट्ट मथुरानाथ शास्त्री), "परिहासाचार्य", (परशुराम शर्मा वैद्य)।

मौलिक लेखन व अनुवाद की पद्धति के अतिरिक्त सार प्रस्तुतीकरण की पद्धति को भी इस युग के लेखको ने स्वीकार किया जो इस प्रकार है–

1 "रघुवंश सार"- (1900) दत्तात्रय वासुदेव निगुडकर 2. "भास कथा सार"- वाई महालिंग शास्त्री (1897–1965) 3 "कादम्बरीकथासार"- (1900)- नन्द लाल शर्मा 4. "चन्द्रापीड चरितम्"- (1909)- व० अनन्ताचार्य 5. "कादम्बरी कथासार"- आर०वी० कृष्णमाचार्य- (1874–1944) 6. "कादम्बरी कथासार"-त्रयंबक शर्मा काले- (1916) 7. "संक्षिप्त कादम्बरी"- (1916)- काशी नाथ शर्मा 8. "हर्षचरित सार"- व० अनन्ताचार्य 9. "हर्षचरित सार"-आर०वी०कृष्णमाचार्य- (1874–1944) 10 "उदयन चरितम्"-18 अध्याय व० अनन्ताचार्य।


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