श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ
पृष्ठ 105, कुल 276 में से
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अध्याय १ ] शाङ्करभाष्यार्थ ९१ ❧❧❧❧❧❧❧❧❧❧❧❧❧
| [Sanskrit Text] | [Hindi Translation] |
|---|---|
| तुशब्दोऽवधारणे । परममेवोत्कृ- | सर्वोत्कृष्ट ही है । मूलमें ‘तु’ शब्द |
| ष्टमेव । संसारधर्मानास्कन्दित- | निश्चयार्थक है । परमेव अर्थात् |
| त्वात् । उद्गीतत्वेन ब्रह्मण | सर्वोत्कृष्ट ही है, क्योंकि वह समस्त सांसारिक धर्मोंसे अनाक्रान्त है । |
| उत्कृष्टत्वात् । “तं यथा यथो- | उद्गीतरूप होनेसे ब्रह्म उत्कृष्ट है । |
| पासते” इति न्यायेनोत्कृष्टब्रह्मो- | “उसे जो जिस प्रकार उपासना करता है” इस न्यायसे उत्कृष्ट ब्रह्मकी |
| पासनादुत्कृष्टमेव फलं मोक्षाख्यं | उपासना करनेसे मोक्षरूप उत्कृष्ट |
| भवत्येवेत्यभिप्रायः । | फल ही होता है ऐसा अभिप्राय है । |
| नन्वेवं तर्हि ब्रह्मणः प्रपञ्चा- | ऐसा होनेपर तो यदि ब्रह्म |
| (हाशिया: प्रपञ्चस्य स्वातन्त्र्यम् आशङ्क्य तन्निरसनम्*)* संस्पृष्टत्वे प्रपञ्च- | प्रपञ्चसे असङ्ग है और ब्रह्मका भी |
| स्यापि ब्रह्मासंसर्गा- | प्रपञ्चसे कोई संसर्ग नहीं है तो |
| त्सांख्यवाद इव | सांख्यवादके समान प्रपञ्च भी पृथक् सिद्ध होनेके कारण स्वतन्त्र होनेसे |
| प्रपञ्चस्यापि पृथक्सिद्धत्वेन स्व- | “विकार वाणीसे आरम्भ होनेवाला |
| तन्त्रत्वाद् “वाचारम्भणं विकारो | नाममात्र है” इस वाक्यके अनुसार |
| नामधेयम्” (छा०उ०६।१।४) इति | प्रपञ्चकी परतन्त्रता स्वीकार कर |
| पारतन्त्र्याभ्युपगमेन मिथ्यात्वोप- | उसका मिथ्यात्व बतलाते हुए |
| देशपूर्वकमद्वितीयब्रह्मात्मत्वेनोप- | अद्वितीय ब्रह्मरूपसे उपदेश करना |
| देशोऽनुपपन्नश्चेत्याशङ्क्याह- | अनुचित ही होगा—ऐसी आशङ्का करके श्रुति कहती है— |
| तस्मिंस्त्रयमिति । यद्यपि ब्रह्म | ‘तस्मिंस्त्रयम्’ इत्यादि । यद्यपि ब्रह्म- |
| प्रपञ्चासंस्पृष्टं स्वतन्त्रं च तथापि | का प्रपञ्चसे संसर्ग नहीं है और वह |
| प्रपञ्चो न स्वतन्त्रः । अपि तु | स्वतन्त्र है तथापि प्रपञ्च स्वतन्त्र नहीं |
| तस्मिन्नेव ब्रह्मणि त्रयं प्रतिष्ठितं | है; अपि तु भोक्ता, भोग्य और प्रेरिता— |
| भोक्ता भोग्यं प्रेरितारमिति | ऐसा कहकर जिनका आगे वर्णन |