भारतकोश
श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

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ॐ तत्सद्ब्रह्मणे नमः श्वेताश्वतरोपनिषद् मन्त्रार्थ, शाङ्करभाष्य और भाष्यार्थसहित नित्यानन्दं निराधारं निखिलाधारमव्ययम् । निगमाद्यगतं नित्यं नीलकण्ठं नमाम्यहम् ॥ शान्तिपाठ ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!! वह परमात्मा हम [ आचार्य और शिष्य ] दोनोंकी साथ-साथ रक्षा करें । हम दोनोंका साथ-साथ पालन करें । हम साथ-साथ विद्यासम्बन्धी सामर्थ्य प्राप्त करें । हम दोनोंका पढ़ा हुआ तेजस्वी हो । हम द्वेष न करें । त्रिविध तापकी शान्ति हो ।