भारतकोश
श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

पृष्ठ 224, कुल 276 में से

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२१० श्वेताश्वतरोपनिषद् [ अध्याय ५ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ❦ ये पूर्वदेवा ऋषयश्च तद्विदु- स्ते तन्मया अमृता वै बभूवुः ॥ ६ ॥ वह वेदोंके गुह्यभाग उपनिषदोंमें निहित है, उस वेदवेद्य परमात्माको ब्रह्मा जानता है। जो पुरातन देव और ऋषिगण उसे जानते थे वे तद्रूप होकर अमर ही हो गये थे ॥ ६ ॥ तदिति। तत्प्रकृतमात्मस्वरूपं | 'तद्वेद' इत्यादि । उस प्रकृत वेदानां गुह्योपनिषदो वेदगुह्योप- | आत्माका स्वरूप वेदोंके गुह्यभाग जो निषदस्तासु वेदगुह्योपनिषत्सु | उपनिषद् हैं उन वेदगुह्योपनिषदोंमें गूढं संवृतम्। ब्रह्मा हिरण्यगर्भो | गूढ—छिपा हुआ है। उस ब्रह्मयोनि वेदते जानाति ब्रह्मयोनिं वेद- | यानी वेदप्रमाणक् आत्माको ब्रह्मा प्रमाणकमित्यर्थः। अथवा ब्रह्मणो | जानता है, अथवा ब्रह्म यानी हिरण्य- हिरण्यगर्भस्य योनिं वेदस्य वा | गर्भके कारण अथवा वेदके कारणभूत ये पूर्वदेवा रुद्रादय ऋषयश्च | उस आत्माको जो रुद्रादि पूर्वदेव वामदेवादयस्तद्विदुस्ते तन्मया- | और वामदेवादि ऋषिगण जानते थे स्तदात्मभूताः सन्तोऽमृता अम- | वे तन्मय—तत्स्वरूप होकर अमृत— रणधर्माणो बभूवुः। तथेदानी- | अमरणधर्मा हो गये । इसी प्रकार न्तनोऽपि तमेव विदित्वामृतो | आधुनिक पुरुष भी उसे जानकर भवतीति वाक्यशेषः ॥ ६ ॥ | अमर हो जाता है—यह वाक्य- | शेष है ॥६॥ ───○○:०:○○─── कर्तृत्वादि धर्मोंसे युक्त जीवात्माके स्वरूपका वर्णन एतावता तत्पदार्थ उपवर्णितः। | इतने ग्रन्थसे तत्पदार्थका वर्णन अथेदानीं त्वंपदार्थमुपवर्णयितु- | किया गया। अब यहाँसे त्वंपदार्थ- | का निरूपण करनेके लिये आगेके मुत्तरे मन्त्राः प्रस्तूयन्ते— | मन्त्र प्रस्तुत किये जाते हैं—

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